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Saturday, October 17, 2026
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संपादकीय

अभिव्यक्ति की आज़ादी बनाम अश्लीलता,डिजिटल दौर में मर्यादा तय करना भी जरूरी

शरद कटियार इंटरनेट और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने मनोरंजन की दुनिया को नई दिशा दी है। आज दर्शक अपनी पसंद का कंटेंट अपनी सुविधा के अनुसार...

अर्थयोग इतना भारी हुआ कि पत्रकारिता व्यावसायिक बन गई

शरद कटियार पत्रकारिता कभी मिशन हुआ करती थी। इसका उद्देश्य सत्ता से सवाल पूछना, समाज को सच से परिचित कराना और लोकतंत्र को मजबूत बनाना...

लोकतंत्र का रास्ता संवाद है, टकराव नहीं

शरद कटियार जब संसद की आवाज़ सड़क पर उतर आए, तो यह केवल विपक्ष का नहीं, लोकतंत्र का भी सवाल बन जाता है भारतीय लोकतंत्र की...

युवाओं पर चटकी लाठी, राष्ट्र के भविष्य पर लगा रही प्रश्नचिह्न

"जिस राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत उसके युवा हों, उस राष्ट्र की सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी उन्हीं युवाओं का सम्मान करना है।" शरद कटियार भारत...

लोकतंत्र में गांधीवादी आंदोलन को दबाना समाधान नहीं

शरद कटियार भारत का लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं, बल्कि असहमति को सुनने और शांतिपूर्ण विरोध को सम्मान देने की परंपरा से भी मजबूत हुआ...

जमानत बरकरार, लेकिन न्याय की अंतिम मंज़िल अभी बाकी

शरद कटियार  भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी न्यायपालिका है। न्यायालय केवल कानून की व्याख्या नहीं करते, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिकों के मौलिक...

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