लखनऊ। बढ़ती गर्मी और महंगाई के दौर में जहां एक ओर जरूरतमंद वर्ग रोजमर्रा की चुनौतियों से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर समाजसेवा की मिसाल पेश करते हुए इण्डियन हेल्पलाइन सोसाइटी (रजि.) द्वारा संचालित बृज की रसोई ने हजारों जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाने का सराहनीय कार्य किया। रविवार को आशियाना क्षेत्र में आयोजित निःशुल्क भोजन, शीतल शरबत और केला वितरण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गरीब, असहाय, दिहाड़ी मजदूर, बुजुर्ग और राहगीरों ने लाभ प्राप्त किया।
संस्था के पदाधिकारियों के अनुसार कार्यक्रम के दौरान लगभग 2000 से अधिक बच्चों, बुजुर्गों, श्रमिकों और जरूरतमंद लोगों को पौष्टिक भोजन, शीतल शरबत और केले वितरित किए गए। भीषण गर्मी के बीच यह सेवा कार्य लोगों के लिए राहत का माध्यम बना।
कार्यक्रम का शुभारंभ पूज्य बाबा नीम करोली महाराज के स्मरण एवं सेवा संकल्प के साथ किया गया। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ भोजन वितरण कर मानवता और सेवा का संदेश दिया।
संस्था से जुड़े समाजसेवियों ने कहा कि किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराना केवल परोपकार नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। सेवा प्राप्त करने वाले जरूरतमंद लोगों के चेहरों पर दिखाई दे रही संतुष्टि और मुस्कान ने आयोजन को और अधिक सार्थक बना दिया।
संस्था के संस्थापक विपिन शर्मा ने कहा कि भारतीय संविधान की मूल भावना समानता, बंधुत्व और सामाजिक न्याय पर आधारित है तथा सेवा कार्य इन मूल्यों को धरातल पर उतारने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि जब समाज का सक्षम वर्ग जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील बनता है, तभी एक मजबूत और समरस समाज का निर्माण संभव हो पाता है।
उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले दानदाताओं, स्वयंसेवकों और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बृज की रसोई भविष्य में भी जरूरतमंदों की सहायता के लिए इसी तरह सेवा कार्यों को जारी रखेगी।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने यह संकल्प भी लिया कि समाज में कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए, इसके लिए सामूहिक प्रयासों को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा। “सेवा ही धर्म है और भोजन सबसे बड़ा दान” के संदेश के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस सेवा अभियान में सी.एच. तिवारी, दीपक भुटियानी, पप्पू कुमार सिंह, संजय श्रीवास्तव, अनुराग दुबे, बलवंत सिंह, राजीव कुमार पटेल, आशीष श्रीवास्तव, अनिल सिंह, विनोद मिश्रा, मुकेश कनौजिया, अखिलेश सिंह, उमाशंकर यादव एवं गोविन्द सिंह ठाकुर सहित अनेक स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई।


