फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देशों के अनुपालन में जिले में पोक्सो अधिनियम-2012 को लेकर विशेष राज्यव्यापी विधिक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष नीरज कुमार के मार्गदर्शन एवं अनुमोदन में संचालित इस अभियान का उद्देश्य बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों और सुरक्षा संबंधी प्रावधानों की जानकारी देना है। अभियान का संयोजन अपर जिला जज एवं नोडल अधिकारी संजय कुमार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पूर्णकालिक सचिव बिंदिया भटनागर द्वारा किया जा रहा है। इसमें प्राधिकरण के कर्मचारियों के साथ पराविधिक स्वयंसेवक भी सहयोग कर रहे हैं।
अभियान के प्रथम चरण में 25 सितंबर से एक अक्टूबर 2026 तक जिले के विभिन्न विद्यालयों में प्रातःकालीन प्रार्थना सभा के दौरान विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। निर्धारित कार्यक्रम के तहत न्यायिक अधिकारी सुबह 7:30 बजे विद्यालयों में पहुंचकर छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों को पोक्सो अधिनियम के प्रावधानों, बाल अधिकारों तथा बच्चों की सुरक्षा से संबंधित कानूनी जानकारी दे रहे हैं।
28 सितंबर को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पूर्णकालिक सचिव बिंदिया भटनागर ने मदन मोहन कनौडिया बालिका इंटर कॉलेज, फर्रुखाबाद में आयोजित जागरूकता शिविर में छात्राओं एवं शिक्षकों को पोक्सो कानून की जानकारी दी। शिविर में 303 छात्राएं एवं शिक्षक उपस्थित रहे। इसी क्रम में अपर सिविल जज (जू.डि.) सुश्री शोभा रानी ने जनता राष्ट्रीय इंटर कॉलेज, फतेहगढ़ में विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किया। इसमें कुल 402 छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। वहीं अपर सिविल जज (जू.डि.) सुश्री श्वेता कश्यप ने फर्रुखाबाद सिटी गर्ल्स इंटर कॉलेज में छात्राओं को बाल सुरक्षा कानूनों के प्रति जागरूक किया। शिविर में 394 छात्राएं मौजूद रहीं।
शिविरों के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने बताया कि कानून की दृष्टि से 18 वर्ष से कम आयु का प्रत्येक व्यक्ति बच्चा यानी नाबालिग है। पोक्सो कानून के तहत नाबालिग की सहमति को वयस्क की सहमति के समान कानूनी मान्यता नहीं दी जाती। अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं को बताया कि प्यार, आपसी सहमति अथवा शादी का वादा नाबालिग से संबंधित यौन अपराधों में कानूनी बचाव नहीं बन सकता।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि नाबालिग को बहला-फुसलाकर साथ ले जाना अथवा उससे विवाह करना गंभीर कानूनी परिणामों का कारण बन सकता है। ऐसे मामलों में पोक्सो अधिनियम के साथ बाल विवाह निषेध कानून के प्रावधान भी लागू हो सकते हैं। अपराध की प्रकृति के अनुसार कठोर दंड का प्रावधान है।
जागरूकता शिविरों में पोक्सो अधिनियम की धारा 19 के संबंध में भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि किसी बालक के साथ अपराध होने की जानकारी मिलने पर संबंधित व्यक्ति को इसकी सूचना देना आवश्यक है। साथ ही पीड़ित बच्चे और सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान को गोपनीय रखने के संबंध में भी जानकारी दी गई।
न्यायिक अधिकारियों ने बच्चों को किसी भी प्रकार की परेशानी, शोषण या आपात स्थिति में चुप न रहने तथा भरोसेमंद व्यक्ति अथवा संबंधित विभाग को जानकारी देने के लिए प्रेरित किया। आपात स्थिति में 112, बाल सहायता के लिए 1098 तथा निःशुल्क विधिक सहायता के लिए 15100 हेल्पलाइन पर संपर्क करने की अपील की गई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के इस अभियान के माध्यम से विद्यालयों में बच्चों के अधिकार, उनकी सुरक्षा और कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगामी दिनों में भी जिले के विभिन्न विद्यालयों में जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे।
पोक्सो कानून को लेकर स्कूलों में चला जागरूकता अभियान, न्यायिक अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं को बताए बाल सुरक्षा के अधिकार


