नई दिल्ली। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा। सर्वोच्च अदालत ने उनकी सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत देने से फिलहाल इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि फिलहाल आसाराम को जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद ही आगे विचार किया जाएगा। पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि जमानत पर तभी विचार किया जा सकता है, जब उनकी स्वास्थ्य स्थिति इतनी गंभीर हो कि जान को वास्तविक खतरा उत्पन्न हो जाए।
सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने दलील दी कि उनके मुवक्किल की उम्र 80 वर्ष से अधिक है और वे कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि आसाराम को आवश्यक और उचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
गौरतलब है कि राजस्थान हाई कोर्ट ने 27 मई 2026 को अपने फैसले में वर्ष 2013 के नाबालिग दुष्कर्म मामले में आसाराम की दोषसिद्धि और ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। हालांकि, हाई कोर्ट ने उन्हें गैंगरेप, आपराधिक साजिश और पॉक्सो अधिनियम की कुछ धाराओं से बरी कर दिया था, लेकिन नाबालिग से दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न, धमकी और अन्य गंभीर धाराओं में दोषसिद्धि को यथावत रखा था।
उल्लेखनीय है कि 25 अप्रैल 2018 को ट्रायल कोर्ट ने अपने आश्रम में एक नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए आसाराम को भारतीय दंड संहिता, पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट राजस्थान सरकार के जवाब के बाद आगे की सुनवाई करेगा।


