नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर पलटवार किया है। केजरीवाल ने खुद को भी ‘दिमागी नक्सल’ बताते हुए कहा कि अगर सवाल पूछना, व्यवस्था में बदलाव की मांग करना और देशभक्ति की बात करना इस श्रेणी में आता है, तो वह भी ‘दिमागी नक्सल’ हैं।
केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि जो लोग खराब व्यवस्था को बदलना चाहते हैं, बेहतर सरकारी स्कूल और अस्पताल चाहते हैं, बिजली-पानी, सीवर और ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग करते हैं तथा भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखते हैं, उन्हें प्रधानमंत्री के हिसाब से ‘दिमागी नक्सल’ कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि वह देशभक्त हैं और देश के खिलाफ कोई कुछ करेगा तो वह उसका मुकाबला करेंगे। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर आज भगत सिंह और बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर जिंदा होते, तो उन्हें भी ‘दिमागी नक्सल’ कहा जाता।
‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक बयानबाजी पिछले कुछ दिनों से तेज है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भी इस संबोधन को अपने लिए इस्तेमाल करते हुए कहा था कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है। वहीं, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने अनुच्छेद 370 के समर्थन के संदर्भ में खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताया।
केजरीवाल ने पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण का एक छोटा हिस्सा अपने वीडियो में साझा किया और उसके बाद अपने अंदाज में इस बयान की व्याख्या की। केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के हिसाब से वह व्यक्ति ‘दिमागी नक्सल’ है, जो देश में सवाल पूछने की हिम्मत रखता है या मौजूदा व्यवस्था में बदलाव चाहता है। उन्होंने कहा कि जो सड़ी-गली व्यवस्था को बदलना चाहता है, अच्छे सरकारी स्कूल और अस्पताल चाहता है, बिजली-पानी, सीवर और ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाएं चाहता है, उसे भी प्रधानमंत्री की परिभाषा के अनुसार ‘दिमागी नक्सल’ कहा जा सकता है।
केजरीवाल ने अपने वीडियो में कहा कि जो व्यक्ति बेहतर व्यवस्था और भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखता है, वह भी पीएम मोदी के हिसाब से ‘दिमागी नक्सल’ है। उन्होंने आगे कहा कि जो प्रधानमंत्री और बीजेपी से डरता नहीं है और विकसित भारत का सपना देखता है, उसे भी इसी श्रेणी में रखा जा रहा है। केजरीवाल ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना या व्यवस्था में बदलाव की मांग करना किसी व्यक्ति को राष्ट्रविरोधी नहीं बनाता। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पीएम मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।


