डॉ विजय गर्ग
स्मार्टफोन आज हमारी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक अधिकांश लोग घंटों मोबाइल स्क्रीन पर बिताते हैं। चाहे पढ़ाई हो, कार्यालय का काम, ऑनलाइन बैठकें, सोशल मीडिया, गेमिंग या मनोरंजन—हर गतिविधि में मोबाइल की भूमिका बढ़ती जा रही है। लेकिन इस सुविधा की एक बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ रही है। दुनिया भर में गर्दन और कंधों के दर्द से पीड़ित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, और इसके पीछे स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
“टेक्स्ट नेक” क्या है?
चिकित्सा विशेषज्ञ लंबे समय से एक समस्या की ओर ध्यान दिला रहे हैं जिसे “टेक्स्ट नेक” (Text Neck Syndrome) कहा जाता है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब व्यक्ति लंबे समय तक गर्दन झुकाकर मोबाइल स्क्रीन देखता रहता है।
सामान्य अवस्था में मानव सिर का वजन लगभग 4 से 5 किलोग्राम होता है। लेकिन जैसे-जैसे गर्दन आगे की ओर झुकती है, रीढ़ और गर्दन की मांसपेशियों पर पड़ने वाला दबाव कई गुना बढ़ जाता है। लगातार ऐसा होने से गर्दन, कंधों और ऊपरी पीठ में दर्द, अकड़न और थकान महसूस होने लगती है।
युवाओं में बढ़ रही समस्या
पहले गर्दन और कंधे का दर्द मुख्य रूप से बढ़ती उम्र के लोगों में देखा जाता था, लेकिन अब यह समस्या किशोरों और युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। ऑनलाइन शिक्षा, मोबाइल गेम्स, सोशल मीडिया और वीडियो देखने की आदत के कारण बच्चे भी घंटों तक झुकी हुई मुद्रा में बैठे रहते हैं।
कार्यालयों में भी कई कर्मचारी लैपटॉप और मोबाइल दोनों का लगातार उपयोग करते हैं, जिससे गर्दन की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
केवल दर्द ही नहीं, और भी समस्याएँ
मोबाइल का अत्यधिक उपयोग केवल गर्दन और कंधों तक सीमित नहीं है। इसके कारण कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं—
सिरदर्द और माइग्रेन
आँखों में जलन और सूखापन
पीठ दर्द
हाथों और कलाई में दर्द
नींद की गुणवत्ता में कमी
मानसिक तनाव और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
यदि समय रहते इन संकेतों पर ध्यान न दिया जाए तो समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है।
किन लोगों को अधिक खतरा?
दिन में कई घंटे मोबाइल इस्तेमाल करने वाले लोग।
विद्यार्थी जो पढ़ाई और मनोरंजन दोनों के लिए मोबाइल का अधिक उपयोग करते हैं।
आईटी और कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारी।
सोशल मीडिया या ऑनलाइन गेमिंग में अधिक समय बिताने वाले युवा।
गलत मुद्रा में बैठकर मोबाइल देखने वाले व्यक्ति।
बचाव कैसे करें?
इस समस्या से बचने के लिए कुछ सरल आदतें अपनाई जा सकती हैं।
मोबाइल को आँखों के स्तर तक उठाकर रखें, ताकि गर्दन अधिक न झुके।
हर 20–30 मिनट के बाद कुछ मिनट का विराम लें। इस दौरान गर्दन, कंधों और पीठ को हल्का-फुल्का स्ट्रेच करें।
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें। बैठने की मुद्रा सही रखें और रीढ़ को सीधा रखने का प्रयास करें।
नियमित रूप से योग और व्यायाम करें। विशेष रूप से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम लाभदायक हो सकते हैं।
रात में सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल का उपयोग करने से बचें, क्योंकि इससे न केवल गर्दन पर दबाव पड़ता है बल्कि नींद भी प्रभावित होती है।
बच्चों पर विशेष ध्यान
माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बच्चों को नियमित रूप से शारीरिक खेल, बाहरी गतिविधियों और किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। यदि बच्चा बार-बार गर्दन दर्द, सिरदर्द या कंधों में अकड़न की शिकायत करता है, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि गर्दन या कंधे का दर्द कई दिनों तक बना रहे, हाथों में झुनझुनी या सुन्नपन महसूस हो, दर्द कंधे से हाथ तक फैलने लगे या सामान्य गतिविधियों में बाधा आने लगे, तो हड्डी रोग विशेषज्ञ या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना आवश्यक है।
निष्कर्ष
स्मार्टफोन आधुनिक जीवन की आवश्यकता बन चुका है, लेकिन उसका विवेकपूर्ण उपयोग ही स्वास्थ्य की रक्षा कर सकता है। तकनीक का लाभ तभी सार्थक है जब वह हमारे जीवन को आसान बनाए, न कि नई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बने। सही मुद्रा, सीमित स्क्रीन समय, नियमित व्यायाम और समय-समय पर आराम जैसी छोटी-छोटी आदतें अपनाकर हम “टेक्स्ट नेक” और गर्दन-कंधों के दर्द जैसी समस्याओं से काफी हद तक बच सकते हैं।
आधुनिक जीवन में तकनीक से दूरी बनाना संभव नहीं है, लेकिन तकनीक का संतुलित और जिम्मेदार उपयोग ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब


