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Wednesday, August 19, 2026

भारत में उद्योग केवल निवेश नहीं, राष्ट्र निर्माण का संकल्प है

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(कमलनाथ-विनायक फीचर्स)

भारत के विकास की कहानी केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन सपनों की कहानी है जिन्हें समय-समय पर दूरदर्शी नेतृत्व ने दिशा दी। मुझे गर्व है कि मुझे अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में देश की औद्योगिक प्रगति के इस सफर का सहभागी बनने का अवसर मिला।
जब मैं केंद्र सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा था, तब मेरा एक ही उद्देश्य था-भारत को आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और औद्योगिक रूप से सशक्त राष्ट्र बनाना। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने जिस आधुनिक भारत का सपना देखा था, वह केवल सूचना प्रौद्योगिकी तक सीमित नहीं था। उनका लक्ष्य भारत को विज्ञान, तकनीक, उद्योग और नवाचार के क्षेत्र में विश्व की अग्रणी शक्तियों में शामिल करना था। मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ कि उनके उस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिला।
मैं हमेशा मानता रहा हूं कि उद्योग केवल बड़े-बड़े कारखानों का नाम नहीं है। उद्योग रोजगार पैदा करता है, युवाओं को अवसर देता है, किसानों की आय बढ़ाता है, छोटे व्यापारियों को बाजार उपलब्ध कराता है और किसी भी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति देता है। यही सोच मेरे प्रत्येक निर्णय के केंद्र में रही। यह सच है कि बिना प्रशिक्षण के रोजगार नही मिलता है।
इसलिए मैंने छिंदवाड़ा में कई स्किल सेंटर शुरू किये। जहां हजारों बच्‍चे विभिन्‍न क्षेत्रों में स्किल्‍ड पाकर देश-विदेश में जॉब कर रहे हैं। जब मैं केंद्र में उद्योग एवं वाणिज्य सहित विभिन्न मंत्रालयों का दायित्व संभाल रहा था, तब मैंने कभी यह नहीं सोचा कि विकास केवल दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, मुंबई, सूरत या बेंगलुरु जैसे महानगरों तक सीमित रहना चाहिए। मेरा स्पष्ट विश्वास था कि यदि भारत को वास्तविक अर्थों में विकसित बनाना है तो उद्योगों का विस्तार देश के हर राज्य और हर क्षेत्र तक होना चाहिए।
इसी सोच के साथ हमने देश के अनेक राज्यों में निवेश को बढ़ावा देने का प्रयास किया। मेरा हमेशा प्रयास रहा कि उद्योग वहां जाएं, जहां रोजगार की सबसे अधिक आवश्यकता है। भारत का प्रत्येक युवा अपने ही प्रदेश और अपने ही जिले में सम्मानजनक रोजगार प्राप्त कर सके, यही मेरी प्राथमिकता रही।
मध्यप्रदेश से मेरा विशेष भावनात्मक रिश्ता रहा है। मैंने हमेशा महसूस किया कि प्राकृतिक संसाधनों, कृषि क्षमता और भौगोलिक स्थिति के बावजूद यह प्रदेश अपनी औद्योगिक संभावनाओं का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा था। इसलिए जब भी अवसर मिला, मैंने मध्यप्रदेश में निवेश आकर्षित करने, औद्योगिक वातावरण विकसित करने और नए उद्योगों की स्थापना के लिए हरसंभव प्रयास किए।
मेरा विश्वास था कि किसी भी राज्य का विकास केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं होता। जब तक निजी निवेश, उद्योग, व्यापार और उद्यमिता को प्रोत्साहन नहीं मिलेगा, तब तक व्यापक आर्थिक परिवर्तन नहीं आ सकता। इसी सोच के साथ उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर लगातार कार्य किया गया।
मैंने हमेशा निवेशकों से कहा कि मध्यप्रदेश केवल एक राज्य नहीं, बल्कि संभावनाओं की भूमि है। यहां पर्याप्त भूमि है, प्राकृतिक संसाधन हैं, मेहनतकश युवा हैं और देश के मध्य में स्थित होने के कारण उत्कृष्ट भौगोलिक स्थिति भी उपलब्ध है। यदि इन सभी विशेषताओं का सही उपयोग किया जाए तो मध्यप्रदेश देश का अग्रणी औद्योगिक राज्य बन सकता है। मेरे लिए उद्योग लगाने का अर्थ केवल फैक्ट्री स्थापित करना नहीं था। मैं चाहता था कि उद्योगों के साथ सड़कें बनें, बिजली पहुंचे, कौशल विकास हो, छोटे व्यवसाय विकसित हों और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले। किसी भी उद्योग की वास्तविक सफलता तभी होती है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
विकास किसी एक व्यक्ति या एक सरकार की संपत्ति नहीं होता। यदि कोई अच्छी योजना आगे बढ़ती है और जनता को उसका लाभ मिलता है तो इससे बड़ी संतुष्टि किसी जनप्रतिनिधि के लिए नहीं हो सकती। मैं हमेशा इस बात का पक्षधर रहा हूं कि सरकारों को विकास के प्रश्न पर राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर कार्य करना चाहिए। यदि किसी पूर्व सरकार ने कोई अच्छा कार्य किया है तो उसे रोकना नहीं, बल्कि आगे बढ़ाना चाहिए। यही लोकतंत्र की परिपक्वता और सुशासन की पहचान है।
औद्योगिक विकास के साथ-साथ मैंने लघु, कुटीर और मध्यम उद्योगों को भी समान महत्व दिया। मेरा मानना रहा है कि भारत की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति हमारे छोटे उद्यमी हैं। यदि उन्हें पूंजी, तकनीक और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। आज पूरी दुनिया तकनीक और नवाचार के युग में प्रवेश कर चुकी है। ऐसे समय में भारत के लिए यह आवश्यक है कि हम आधुनिक उद्योगों, सूचना प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, निर्यात और अनुसंधान को प्राथमिकता दें। यह केवल आर्थिक विकास का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता का भी प्रश्न है।
मैंने हमेशा युवाओं को भारत की सबसे बड़ी पूंजी माना है। यदि उन्हें अवसर, प्रशिक्षण और संसाधन मिलें तो वे दुनिया में किसी से पीछे नहीं हैं। इसलिए मेरी सोच हमेशा रोजगार सृजन केंद्रित रही। उद्योगों का विस्तार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।मुझे इस बात का भी संतोष है कि आज देश में औद्योगिकीकरण, विनिर्माण और आत्मनिर्भरता को लेकर जो व्यापक वातावरण बना है, उसमें अतीत में किए गए अनेक प्रयासों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विकास एक सतत प्रक्रिया है और प्रत्येक पीढ़ी उसमें अपना योगदान देती है।
मेरे सार्वजनिक जीवन का मूल मंत्र हमेशा यही रहा है कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए स्थायी परिवर्तन लाना होना चाहिए। यदि मेरे प्रयासों से देश के किसी युवा को रोजगार मिला, किसी परिवार की आय बढ़ी, किसी जिले में उद्योग स्थापित हुआ या किसी राज्य के विकास को नई गति मिली, तो मैं इसे अपने सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानता हूं। भारत के पास अपार संभावनाएं हैं। हमें केवल उन संभावनाओं को सही दिशा देने की आवश्यकता है। मेरा विश्वास है कि यदि उद्योग, कृषि, तकनीक और कौशल विकास एक साथ आगे बढ़ें तो भारत विश्व की अग्रणी आर्थिक शक्तियों में स्थायी स्थान प्राप्त करेगा।
यही मेरा विश्वास था, यही मेरा प्रयास रहा और यही मेरा संकल्प आज भी है कि विकास का लाभ देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, उद्योगों की रोशनी महानगरों से निकलकर गांवों और छोटे शहरों तक पहुंचे और भारत आर्थिक समृद्धि के साथ सामाजिक न्याय का भी उदाहरण बने। यही सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माण का मार्ग है। (लेखक, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हैं)

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