36 C
Lucknow
Tuesday, June 2, 2026

तपती दीवारों के बीच

Must read

डॉ विजय गर्ग
गर्मियों का मौसम हमेशा से भारत के जीवन का हिस्सा रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में गर्मी की तीव्रता ने एक नई चिंता को जन्म दिया है। तापमान के लगातार बढ़ते रिकॉर्ड, लू के लंबे दौर और रात के समय भी न घटने वाली गर्मी ने लोगों के जीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। आज शहरों और कस्बों में रहने वाले करोड़ों लोग सचमुच “तपती दीवारों के बीच” जीवन बिताने को मजबूर हैं।

कंक्रीट और सीमेंट से बने आधुनिक शहर दिनभर सूर्य की गर्मी को सोखते हैं और रात में धीरे-धीरे उसे छोड़ते हैं। परिणामस्वरूप घरों की दीवारें, छतें और सड़कें देर रात तक गर्म बनी रहती हैं। इसे “अर्बन हीट आइलैंड” प्रभाव कहा जाता है। जहां कभी पेड़-पौधे, खुले मैदान और जल स्रोत वातावरण को ठंडा रखते थे, वहीं अब उनकी जगह ऊंची इमारतों और पक्की सड़कों ने ले ली है।

सबसे अधिक प्रभावित वे लोग होते हैं जिनके पास वातानुकूलित कमरे या पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। छोटे घरों में रहने वाले परिवार, मजदूर, बुजुर्ग और बच्चे लगातार गर्मी का सामना करते हैं। दिनभर की तपिश के बाद जब रात को भी राहत नहीं मिलती, तो नींद प्रभावित होती है। खराब नींद से मानसिक तनाव, थकान, चिड़चिड़ापन और कई स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ने लगती हैं।

तपती दीवारें केवल असुविधा का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे जलवायु परिवर्तन की गंभीर चेतावनी भी हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण हीटवेव की घटनाएं अधिक बार और अधिक तीव्र हो रही हैं। यदि वर्तमान स्थिति जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं और भी बढ़ सकती हैं।

इस चुनौती का समाधान केवल एयर कंडीशनर नहीं हैं। अधिक हरियाली, छतों पर बागवानी, वर्षा जल संरक्षण, ऊष्मा-रोधी निर्माण सामग्री और बेहतर शहरी नियोजन जैसी पहलें लंबे समय तक राहत दे सकती हैं। घरों के आसपास पेड़ लगाना, सफेद या परावर्तक रंगों का उपयोग करना और प्राकृतिक वेंटिलेशन को बढ़ावा देना भी प्रभावी उपाय हैं।

आज आवश्यकता इस बात की है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। यदि शहरों को रहने योग्य बनाए रखना है, तो उन्हें केवल आधुनिक नहीं बल्कि जलवायु-अनुकूल भी बनाना होगा। अन्यथा आने वाली पीढ़ियां और अधिक तपती दीवारों, गर्म रातों और कठिन जीवन परिस्थितियों का सामना करेंगी।

तपती दीवारों के बीच जी रहा आज का समाज केवल गर्मी से नहीं लड़ रहा, बल्कि वह अपने विकास मॉडल पर भी पुनर्विचार करने के लिए मजबूर हो रहा है। यह समय है जब हम प्रकृति के साथ अपने संबंधों को फिर से मजबूत करें और ऐसे शहरों का निर्माण करें जो इंसानों के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी अनुकूल हों।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article