PM मोदी ने पुतिन के बाद जेलेंस्की को फोन किया:कहा- जंग रोकें, बातचीत करें; रूसी राष्ट्रपति को चुनाव जीतने की बधाई दी

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यूथ इंडिया, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को फोन करके चुनाव जीतने की बधाई दी। इस दौरान दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन जंग पर चर्चा की। PM मोदी ने जंग पर भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि कूटनीति और बातचीत के जरिए मसले का हल निकाला जाना चाहिए।

इसके चंद घंटे बाद ही PM मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को भी फोन किया। उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति से भी बातचीत के जरिए जंग का हल निकालने को कहा।

फोन कॉल के बाद PM मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा- राष्ट्रपति जेलेंस्की से भारत-यूक्रेन साझेदारी को मजबूत करने पर अच्छी चर्चा हुई। भारत ने हमेशा से जंग जल्द खत्म करने और शांति का समर्थन किया है। हम हमेशा मानवीय सहायता जारी रखेंगे।

पुतिन ने PM मोदी को चुनाव जीतने के लिए शुभकामनाएं दीं
इससे पहले, पुतिन से बात करने के बाद PM मोदी ने कहा था- रूस के राष्ट्रपति को एक बार फिर से चुनाव जीतने की बधाई दी। भारत-रूस के बीच खास दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी है। हम आने वाले सालों में इसे और मजबूत करने के लिए काम करते रहेंगे।

वहीं रूसी राष्ट्रपति के ऑफिस क्रेमलिन के मुताबिक, पुतिन ने भी PM मोदी को लोकसभा चुनाव के लिए शुभकामनाएं दीं। दरअसल, रूस में 15-17 मार्च को राष्ट्रपति पद के चुनाव हुए थे। इसमें पुतिन ने 88% वोटों के साथ जीत दर्ज की थी। इसी के साथ पुतिन लगातार 5वीं बार रूस के राष्ट्रपति बनेंगे।

रूस-यूक्रेन जंग को 2 साल पूरे
फरवरी 2024 में रूस-यूक्रेन जंग को 2 साल पूरे हो गए। अमेरिका के आंकड़ों के मुताबिक जंग में अब तक रूस के 1 लाख 80 हजार और यूक्रेन के 70 हजार सैनिक मारे जा चुके हैं। यूक्रेन के 5 बड़े शहरों पर रूस का कब्जा है।

दोनों देश समझौते को तैयार नहीं हैं। यूक्रेन का कहना है कि जब तक रूस उसके राज्यों से कब्जा नहीं हटा लेता है वो हमले जारी रखेंगे। जबकि रूस यूक्रेनी राज्यों से कब्जा नहीं छोड़ना चाहता।

मोदी ने पुतिन से कहा था- यह युद्ध का युग नहीं है
रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद से PM मोदी कई बार पुतिन और जेलेंस्की से फोन पर बातचीत कर चुके हैं। युद्ध को लेकर भारत ने हमेशा से आम लोगों की हत्या की निंदा की है और टकराव को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म करने की बात की।

PM मोदी ने साल 2022 में उज्बेकिस्तान में SCO समिट के मौके पर राष्ट्रपति पुतिन से कहा था कि यह युद्ध का युग नहीं है। यह बयान भारत की अध्यक्षता में G20 के घोषणा पत्र में भी लिखा गया था। पिछले साल अमेरिका दौरे से पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए एक इंटरव्यू में PM मोदी ने रूस-यूक्रेन जंग पर बात की थी।

जंग के 15 महीने बाद मई 2023 में PM मोदी ने जेलेंस्की से मुलाकात की थी।
जंग के 15 महीने बाद मई 2023 में PM मोदी ने जेलेंस्की से मुलाकात की थी।

PM मोदी बोले- जंग पर हम तटस्थ, शांति के समर्थन में
उन्होंने कहा था- भारत तटस्थ है, लेकिन शांति के समर्थन में है। सभी देशों को अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का पालन करना चाहिए और दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। विवाद बातचीत के जरिए सुलझाए जाने चाहिए, न कि जंग से। भारत इस जंग को रोकने की हर संभव कोशिश करेगा।

दिसंबर, 2023 में विदेश मंत्री जयशंकर रूस के दौरे पर भी गए थे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की थी। बैठक के दौरान यूक्रेन जंग पर पुतिन ने कहा था- मैंने PM मोदी को कई बार स्थिति की जानकारी दी है। मैं जानता हूं कि वे इस संकट का शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। मैं उनके साथ मिलकर इस मुद्दे पर चर्चा करना चाहता हूं।

जेलेंस्की से एक बार मिले PM मोदी, कहा- यह जंग इंसानियत का मुद्दा
रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद से PM मोदी ने अब तक सिर्फ एक बार यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात की है। यह पिछले साल जापान के हिरोशिमा शहर में G7 समिट के दौरान हुई थी। तब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) अजित डोभाल भी मौजूद रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने जेलेंस्की से कहा था- यूक्रेन जंग इकोनॉमी और पॉलिटिक्स का नहीं, इंसानियत का मुद्दा है। भारत इस जंग को खत्म करने के लिए हर कदम उठाने को तैयार है।

रूस-यूक्रेन विवाद की वजह बना NATO

  • 1991 में सोवियत संघ के 15 हिस्सों में टूटने के बाद NATO ने खासतौर पर यूरोप और सोवियत संघ का हिस्सा रहे देशों के बीच तेजी से प्रसार किया।
  • 2004 में NATO से सोवियत संघ का हिस्सा रहे तीन देश- लातविया, एस्तोनिया और लिथुआनिया जुड़े, ये तीनों ही देश रूस के सीमावर्ती देश हैं।
  • पोलैंड (1999), रोमानिया (2004) और बुल्गारिया (2004) जैसे यूरोपीय देश भी NATO के सदस्य बन चुके हैं। ये सभी देश रूस के आसपास हैं। इनके और रूस के बीच सिर्फ यूक्रेन पड़ता है।
  • यूक्रेन कई साल से NATO से जुड़ने की कोशिश करता रहा है। उसकी हालिया कोशिश की वजह से ही रूस ने यूक्रेन पर हमला किया है।
  • यूक्रेन की रूस के साथ 2200 किमी से ज्यादा लंबी सीमा है। रूस का मानना है कि अगर यूक्रेन NATO से जुड़ता है तो NATO सेनाएं यूक्रेन के बहाने रूसी सीमा तक पहुंच जाएंगी।
  • यूक्रेन के NATO से जुड़ने पर रूस की राजधानी मॉस्को की पश्चिमी देशों से दूरी केवल 640 किलोमीटर रह जाएगी। अभी ये दूरी करीब 1600 किलोमीटर है। रूस चाहता है कि यूक्रेन ये गांरटी दे कि वह कभी भी NATO से नहीं जुड़ेगा।

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