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Friday, August 21, 2026

यूपी में अब ऐप से बुकिंग वाले सफर में मनमानी पर लगेगी लगाम, किराये पर भी योगी सरकार की नजर

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प्रदेश में एग्रीगेटर नीति 2026 लागू होने से यात्रियों की सुरक्षा से लेकर ड्राइवरों के हित तक तय हुए नए मानक

आवेदन से लाइसेंस तक, कंपनियों के लिए तय हुई स्पष्ट व्यवस्था, सुरक्षा जमा राशि से कंपनियों की जवाबदेही होगी मजबूत

ऐप आधारित यात्री परिवहन के साथ डिलीवरी और लॉजिस्टिक नेटवर्क भी इसके दायरे में आएंगे

हर यात्री के लिए बीमा, बिना कारण पिकअप कैंसिल करने पर कंपनी पर लगेगा 100 रुपये का अर्थदंड

ड्राइवरों के हित के लिए 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा, 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस

3.15 लाख से अधिक वाहन पोर्टल पर ऑनबोर्ड, यूपी में सुरक्षित और स्मार्ट परिवहन की ओर बड़ा कदम

लखनऊ, 21 अगस्त। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में परिवहन और डिलीवरी सेवाओं को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक एवं वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली 2026 को लागू कर दिया है। इसके साथ upmyfleet.com एग्रीगेटर पोर्टल भी शुरू कर दिया गया है। नई व्यवस्था में यात्रियों की सुरक्षा, ड्राइवरों का कल्याण, वाहन प्रदूषण की निगरानी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा, किराये में पारदर्शिता और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए कई महत्वपूर्ण मानक तय किए गए हैं।

एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवाओं को पहली बार मिला व्यापक नियामक ढांचा
उत्तर प्रदेश सरकार ने 22 मई 2026 की अधिसूचना के माध्यम से उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक एवं वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली, 2026 लागू की है। इसके तहत एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवा प्रदाताओं के लिए आवेदन, लाइसेंस, सुरक्षा जमा राशि और संचालन से जुड़े नियम तय किए गए हैं। यह व्यवस्था उन डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म से जुड़ी सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके माध्यम से यात्रियों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाती है या किसी चालक को विक्रेता, ई-कॉमर्स इकाई अथवा प्रेषक से जोड़कर उत्पाद, कूरियर, पैकेज या पार्सल पहुंचाने की सेवा दी जाती है। यानी ऐप आधारित यात्री परिवहन के साथ डिलीवरी और लॉजिस्टिक नेटवर्क भी इसके दायरे में आते हैं।

आवेदन से लाइसेंस तक, कंपनियों के लिए तय हुई स्पष्ट व्यवस्था
नई नीति के तहत एग्रीगेटर को संचालन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। आवेदन की फीस 25 हजार रुपये और लाइसेंस प्रदान करने की फीस 5 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इससे एग्रीगेटर सेवाओं के संचालन के लिए एक स्पष्ट और औपचारिक नियामक व्यवस्था तैयार होगी। इस व्यवस्था का फायदा सरकार के साथ-साथ कंपनियों को भी होगा। कंपनियों को नियमों, सुरक्षा मानकों और सेवा की गुणवत्ता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलेंगे, जबकि परिवहन विभाग के पास एग्रीगेटर सेवाओं की निगरानी के लिए व्यवस्थित ढांचा रहेगा।

सुरक्षा जमा राशि से कंपनियों की जवाबदेही बढ़ेगी
नीति में एग्रीगेटर द्वारा जमा की जाने वाली सुरक्षा राशि को वाहन बेड़े के आकार से जोड़ा गया है। नियम के अनुसार 100 बस या 1,000 अन्य मोटरयान तक के बेड़े के लिए 10 लाख रुपये, 1,000 बस या 10,000 अन्य मोटरयान तक के बेड़े के लिए 25 लाख रुपये और 1,000 से अधिक बस या 10,000 से अधिक अन्य मोटरयान वाले बड़े बेड़े के लिए 50 लाख रुपये की सुरक्षा जमा राशि निर्धारित की गई है। इससे बड़े स्तर पर कारोबार करने वाले एग्रीगेटरों की जवाबदेही बढ़ेगी। सुरक्षा जमा राशि का प्रावधान यह सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है कि लाइसेंस की शर्तों या मोटर वाहन कानून एवं नियमों के उल्लंघन की स्थिति में नियामकीय कार्रवाई प्रभावी तरीके से की जा सके।

यात्रियों की सुरक्षा होगी सर्वोच्च प्राथमिकता
योगी सरकार की नई नीति में यात्रियों की सुरक्षा को प्रमुख स्थान दिया गया है। एग्रीगेटर के माध्यम से जुड़े ड्राइवरों का चरित्र सत्यापन, पुलिस सत्यापन और मनोवैज्ञानिक परीक्षण कराने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही चालकों को समय-समय पर रिफ्रेशर ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

हर यात्री के लिए बीमा, ड्राइवरों को भी स्वास्थ्य और जीवन सुरक्षा बीमा
नई व्यवस्था में केवल यात्री ही नहीं, बल्कि ड्राइवरों के कल्याण को भी महत्व दिया गया है। प्रत्येक यात्री के लिए बीमा की व्यवस्था एग्रीगेटर को करनी होगी। वहीं चालकों के कल्याण के लिए 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। यह प्रावधान ड्राइवरों के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। ऐप आधारित परिवहन और डिलीवरी सेवाओं में बड़ी संख्या में चालक काम करते हैं। ऐसे में दुर्घटना, बीमारी या असमय मृत्यु जैसी परिस्थितियों में बीमा सुरक्षा उनके परिवारों के लिए आर्थिक सहारा बनेगी।

किराये में मनमानी पर रोक, डायनेमिक प्राइसिंग की अधिकतम सीमा तय
नई नीति में यात्रियों से लिए जाने वाले किराये को लेकर भी महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। एग्रीगेटर द्वारा डायनेमिक प्राइसिंग के माध्यम से किराया बढ़ाए जाने की स्थिति में निर्धारित बेस फेयर से अधिकतम 50 प्रतिशत तक किराया निर्धारित करने की व्यवस्था की गई है। इससे मांग बढ़ने के समय किराये में होने वाली अत्यधिक वृद्धि पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। यात्रियों को सेवा की वास्तविक लागत और अधिकतम किराये के बारे में बेहतर स्पष्टता मिलेगी, जबकि एग्रीगेटरों को भी मूल्य निर्धारण के लिए स्पष्ट सीमा प्राप्त होगी।

बुकिंग के बाद यात्री को पिकअप न करने पर 100 रुपये का अर्थदंड
यात्रियों की सुविधा और समय की बचत को ध्यान में रखते हुए ट्रिप बुक होने के बाद चालक द्वारा निर्धारित समय तक यात्री को पिकअप नहीं करने की स्थिति में 100 रुपये अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। नीति में यह व्यवस्था भी है कि इस पेनाल्टी से मिलने वाला लाभ यात्री को अगली ट्रिप में दिया जाएगा। इससे बुकिंग स्वीकार करने के बाद चालक द्वारा बिना उचित कारण यात्रा रद्द करने या यात्री को लेने नहीं पहुंचने की समस्या पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। साथ ही यात्री के समय और सुविधा को महत्व मिलेगा।

शिकायतों के समाधान के लिए हर एग्रीगेटर में अधिकारी
यात्रियों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रत्येक एग्रीगेटर को ग्रिवांस रिड्रेसल ऑफिसर (शिकायत निवारण अधिकारी) नियुक्त करना होगा। इससे किराये, बुकिंग, चालक, सेवा या अन्य समस्याओं को लेकर यात्रियों को शिकायत दर्ज कराने और उसके समाधान के लिए एक निर्धारित व्यवस्था मिलेगी। इसके अलावा लाइसेंस की शर्तों व मोटर वाहन अधिनियम और नियमावली में निर्धारित प्रावधानों का उल्लंघन होने पर पेनाल्टी की व्यवस्था भी की गई है। इससे एग्रीगेटर कंपनियों के संचालन में जवाबदेही बढ़ेगी और नियमों का पालन सुनिश्चित करने में विभाग को मदद मिलेगी।

एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर विशेष जोर
उत्तर प्रदेश सरकार की इस व्यवस्था में एनसीआर क्षेत्र को विशेष रूप से ध्यान में रखा गया है। एग्रीगेटर के बेड़े में शामिल वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण की निगरानी के लिए पोर्टल के माध्यम से लगातार मॉनिटरिंग की व्यवस्था विकसित की गई है। इससे विशेष रूप से एनसीआर में वाहन प्रदूषण पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। इसके साथ एग्रीगेटर के फ्लीट में इलेक्ट्रिक व्हीकल ट्रांजिशन (यानी पेट्रोल-डीजल वाहनों से बैटरी या बिजली से चलने वाले वाहनों की ओर बदलाव) सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। इससे आने वाले समय में परिवहन और डिलीवरी सेवाओं में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने तथा प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। वहीं यह पहल उत्तर प्रदेश के एनसीआर वाले क्षेत्रों में विशेष महत्व रखती है, जहां बड़ी संख्या में कैब, डिलीवरी और अन्य व्यावसायिक वाहन चलते हैं। पोर्टल आधारित निगरानी से सरकार को वाहन बेड़े की स्थिति और उसके नियामकीय अनुपालन की जानकारी अधिक व्यवस्थित रूप से मिल सकेगी।

सरकार, कंपनियों, चालकों और यात्रियों—सभी को फायदा
नई एग्रीगेटर नीति का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे इस क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनती है। सरकार और परिवहन विभाग को एग्रीगेटर कंपनियों और उनके वाहनों की निगरानी, नियमों के अनुपालन व प्रदूषण नियंत्रण के लिए डिजिटल माध्यम मिलेगा। कंपनियों के लिए लाइसेंस, शुल्क, सुरक्षा जमा राशि और संचालन मानकों की स्पष्टता रहेगी। इससे अनियंत्रित तरीके से सेवाएं चलाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगने और संगठित परिवहन बाजार विकसित होने की उम्मीद है। चालकों के लिए चरित्र सत्यापन, प्रशिक्षण, रिफ्रेशर ट्रेनिंग, स्वास्थ्य बीमा और टर्म इंश्योरेंस जैसी व्यवस्थाएं सुरक्षा और सामाजिक कल्याण को मजबूत करेंगी। वहीं यात्रियों को सत्यापित चालक, बीमा सुरक्षा, किराये की सीमा, शिकायत निवारण और बुकिंग के बाद पिकअप न होने पर मुआवजा जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

यूपी माय फ्लीट पोर्टल बना निगरानी और प्रबंधन का डिजिटल माध्यम
नई नीति के क्रियान्वयन में upmyfleet.com महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। दस्तावेज के अनुसार वर्तमान में एग्रीगेटर पोर्टल क्रियाशील है और एनसीआर क्षेत्र के दो एग्रीगेटर व उनके 3,15,218 वाहन ऑनबोर्ड हैं। इस डिजिटल व्यवस्था के जरिए सरकार के पास एग्रीगेटर सेवाओं से जुड़े वाहनों का व्यवस्थित डेटाबेस तैयार होगा। इससे नियमों के अनुपालन, वाहन प्रदूषण की निगरानी और फ्लीट के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ट्रांजिशन को ट्रैक करने में मदद मिलेगी।

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