लखनऊ
गुरुवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय के बाहर डायल-108 और डायल-102 एंबुलेंस सेवाओं से जुड़े पूर्व चालकों ने रोजगार की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। दोपहर करीब एक बजे बड़ी संख्या में चालक हाथों में तख्तियां लेकर पहुंचे और नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कई चालक भावुक होकर रो पड़े। उनका कहना था कि कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने दिन-रात मरीजों की जान बचाने के लिए काम किया, लेकिन महामारी के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने तख्तियों पर लिखा था, “कोरोनाकाल में हमें हीरो कहा, अब हम जीरो हो गए।”
प्रदर्शन कर रहे चालकों का आरोप है कि एंबुलेंस सेवा संचालित करने वाली निजी कंपनी GVKEMRI ने वर्ष 2021 में, कोरोना संकट कम होने के तुरंत बाद, उन्हें सेवा से हटा दिया। उनका कहना है कि तब से वे लगातार बेरोजगार हैं और पिछले पांच वर्षों से रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि महामारी के दौरान उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया, जबकि कई कर्मचारियों ने ड्यूटी के दौरान अपनी जान भी गंवाई। इसके बावजूद उन्हें स्थायी रोजगार या पुनर्नियुक्ति का अवसर नहीं दिया गया।
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। बाद में पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे एंबुलेंस चालकों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया, जहां अक्सर धरना-प्रदर्शन की अनुमति दी जाती है। इस दौरान भाजपा कार्यालय के बाहर कुछ देर के लिए हलचल का माहौल बना रहा। प्रदर्शनकारी सरकार से हस्तक्षेप कर उनकी नौकरी बहाल कराने और रोजगार उपलब्ध कराने की मांग करते रहे।
प्रदर्शनकारियों ने निजी कंपनी पर नौकरी से निकालने के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक शोषण जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। उनका कहना है कि कोरोना महामारी के कठिन दौर में दी गई सेवाओं का उन्हें कोई सम्मान नहीं मिला और आज वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने सरकार से मामले की जांच कराने, उनकी समस्याओं का समाधान निकालने और योग्य कर्मचारियों को दोबारा रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की।


