फर्रुखाबाद, नई दिल्ली । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा के केंद्र में हैं। हाल ही में उनके द्वारा समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर दिए गए बयान फिर होंगे वज़ीर -ए -आला, छोटी सी जगह हमें भी दे दें…. ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। वहीं फर्रुखाबाद में भी सलमान खुर्शीद का राजनीतिक प्रभाव और उनकी सक्रियता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
फर्रुखाबाद की राजनीति में सलमान खुर्शीद का नाम कोई नया नहीं है। दशकों से जिले की राजनीति में उनकी पहचान एक बड़े राष्ट्रीय नेता के रूप में रही है। केंद्र सरकार में मंत्री रहने के साथ-साथ उन्होंने फर्रुखाबाद को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बनाए रखा। चुनावी हार-जीत के बावजूद उनका प्रभाव कांग्रेस संगठन और एक वर्ग विशेष में आज भी कायम माना जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए सलमान खुर्शीद की रणनीति पर विशेष नजर रखी जा रही है। जिले में कांग्रेस का संगठन भले ही पहले जैसा मजबूत न दिखाई देता हो, लेकिन खुर्शीद परिवार की मौजूदगी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए अब भी ऊर्जा का स्रोत मानी जाती है।
हाल के महीनों में खुर्शीद परिवार की क्षेत्रीय सक्रियता भी बढ़ी है।उनकी पत्नी पूर्व विधायक लूईस खुर्शीद विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों, जनसंपर्क अभियानों और संगठनात्मक बैठकों के जरिए कांग्रेस अपने पुराने जनाधार को पुनर्जीवित करने की कोशिश में जुटी दिखाई दे रही है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि फर्रुखाबाद में कांग्रेस को दोबारा मजबूती हासिल करनी है तो उसकी सबसे बड़ी उम्मीद आज भी सलमान खुर्शीद ही हैं। राष्ट्रीय राजनीति में उनकी पहचान, अल्पसंख्यक समाज में प्रभाव और विभिन्न वर्गों में उनकी स्वीकार्यता उन्हें जिले की राजनीति का महत्वपूर्ण चेहरा बनाए रखती है।
फिलहाल चुनाव दूर हैं, लेकिन सलमान खुर्शीद के बयानों और राजनीतिक गतिविधियों ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि फर्रुखाबाद में कांग्रेस आगामी चुनावी मुकाबले को लेकर गंभीर तैयारी में जुट चुकी है। जिले की राजनीति में ‘खुर्शीद फैक्टर’ एक बार फिर चर्चा का विषय बनता जा रहा है।


