कानपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि यही खेती का भविष्य है, जो किसानों की लागत घटाने, आय बढ़ाने और लोगों को स्वस्थ जीवन देने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है। कानपुर में आयोजित ‘प्राकृतिक खेती कार्यशाला-2026’ में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि रासायनिक खेती के बढ़ते दुष्प्रभावों के बीच अब समय आ गया है कि किसान पारंपरिक और गो-आधारित प्राकृतिक खेती को अपनाकर कृषि को नई दिशा दें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती से किसानों को प्रति एकड़ 10 से 12 हजार रुपये तक की बचत हो सकती है। इससे न केवल उत्पादन लागत कम होगी बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ेगी और लोगों को रसायन मुक्त खाद्यान्न उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि स्वस्थ किसान और स्वस्थ समाज ही विकसित भारत की मजबूत नींव बन सकते हैं।
योगी आदित्यनाथ ने गोवंश संरक्षण को प्राकृतिक खेती का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि कुछ लोग गाय का दूध लेने के बाद उसे बेसहारा छोड़ देते हैं, जिससे किसानों को फसलों के नुकसान का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार गोवंश संरक्षण और किसानों के हितों की रक्षा के लिए लगातार काम कर रही है। प्रदेश की 7,700 से अधिक गोशालाओं में 14 लाख से ज्यादा गोवंश संरक्षित हैं और मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत गोपालकों को आर्थिक सहायता भी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले किसान अधिक लागत और कम आय की समस्या से परेशान था, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं ने कृषि क्षेत्र को नई मजबूती दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, कृषि सिंचाई योजना और सॉइल हेल्थ कार्ड जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे किसानों को आर्थिक सुरक्षा और बेहतर अवसर मिले हैं।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के 34 जिलों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। गंगा किनारे के 27 जिलों और बुंदेलखंड के सात जिलों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों के सर्टिफिकेशन, पैकेजिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था विकसित की जा रही है ताकि किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने किसानों से पराली जलाने के बजाय उससे कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और इथेनॉल उत्पादन में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ेगी और देश ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किसानों की समृद्धि, गांवों की आत्मनिर्भरता और कृषि क्षेत्र का सशक्त होना बेहद जरूरी है। उनका कहना था कि जब किसान मजबूत होगा, गांव आत्मनिर्भर बनेंगे और युवाओं को रोजगार मिलेगा, तभी विकसित भारत का सपना साकार हो सकेगा।


