लेखपाल-कानूनगो ने गांव पहुंचकर किसानों के साथ किया निरीक्षण, शत-प्रतिशत नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजने की बात
शमसाबाद, फर्रुखाबाद। विनाशकारी बारिश और जलभराव ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसलें जलमग्न होकर बर्बाद हो गईं, वहीं कई गरीब परिवारों के कच्चे मकान भी बारिश की चपेट में आकर धराशायी हो गए। इसके बावजूद फसलों के नुकसान के सर्वे को लेकर किसानों में लगातार असंतोष बना हुआ था। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत किए जाने के बाद आखिरकार राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जलमग्न फसलों का स्थलीय निरीक्षण किया।
शमसाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम रजला मई निवासी किसान आशीष गंगवार ने बताया कि उन्होंने करीब 22 बीघा खेत में धान की फसल तैयार की थी। लगातार हुई भारी बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया और पूरी फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो गई। फसल बर्बाद होने के बाद किसान ने उपजिलाधिकारी कायमगंज को शिकायती पत्र देकर नुकसान का मौके पर सर्वे कराए जाने तथा शासन से आर्थिक मुआवजा दिलाए जाने की मांग की थी।
किसान का आरोप था कि अधिकारियों के निर्देश के बावजूद क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा मौके पर पहुंचकर फसल का सर्वे नहीं किया गया, बल्कि गांव में ही सर्वे की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। किसान को इस सर्वे की जानकारी तक नहीं हो सकी। इसे लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत करने के साथ ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर भी शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उच्चाधिकारियों ने क्षेत्रीय लेखपाल को मौके पर जाकर फसल के नुकसान का दोबारा स्थलीय सर्वे करने के निर्देश दिए। मंगलवार को क्षेत्रीय लेखपाल अनिल कुमार शर्मा तथा कानूनगो कुतुबुद्दीन गांव पहुंचे। राजस्व टीम ने किसान आशीष गंगवार सहित अन्य किसानों के साथ खेतों में पहुंचकर मौके का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान खेतों में चारों ओर पानी भरा मिला और धान की फसल पूरी तरह जलमग्न दिखाई दी। राजस्व टीम ने मौके पर फसल की स्थिति का जायजा लिया और नुकसान का आकलन किया। किसानों ने टीम को बताया कि लगातार बारिश और जलभराव के कारण उनकी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं और अब उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
स्थलीय निरीक्षण के दौरान राजस्व अधिकारियों ने भी फसल को हुए नुकसान को गंभीर बताया। किसानों के अनुसार, मौके पर वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद उन्हें उम्मीद जगी है कि प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर शासन से आर्थिक सहायता मिल सकेगी।
क्षेत्रीय लेखपाल और कानूनगो ने किसानों को बताया कि मौके पर किए गए सर्वे की रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। इसके बाद शासन स्तर से मिलने वाली सहायता के संबंध में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं किसानों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर वास्तविक नुकसान का आकलन करती तो उन्हें अपनी बर्बाद फसल का सही मुआवजा मिलने की उम्मीद पहले ही हो जाती। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जलभराव से बर्बाद हुई सभी फसलों का निष्पक्ष सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद जागा प्रशासन, 22 बीघा जलमग्न धान की फसल का मौके पर हुआ सर्वे


