– हटाए गए आरोपों से लगातार घिरे सनी कनौजिया
– विक्रम सिंह चाहर की एंट्री बनाये गए नए तहसीलदार सदर
फर्रुखाबाद। जिले के प्रशासनिक गलियारों में शनिवार को बड़ा भूचाल देखने को मिला, जब जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने तहसील सदर में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए पूरे राजस्व सिस्टम की तस्वीर बदल दी। लंबे समय से विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे प्रभारी तहसीलदार सनी कनौजिया से प्रभार छीनकर उन्हें मूल पद नायब तहसीलदार पर भेज दिया गया। उनकी जगह विक्रम सिंह चाहर को सदर तहसीलदार बनाया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, तहसील सदर में पिछले कुछ महीनों से दाखिल-खारिज, नामांतरण और भूमि विवादों में लगातार शिकायतें मिल रही थीं। तहसील सदर के अधिवक्ता भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर लगातार हड़ताल पर भी थे वहीं कई कानून को लेखपाल खुद ही सरकारी गैर सरकारी जमीनों पर अभिलेखों में हेर फेर कर कब्जे करने लगे थे जिनकी लगातार शिकायतें हो रही थी।
कई मामलों में राजस्व कर्मियों द्वारा फाइलें महीनों तक दबाए रखने और “रकम के बिना काम नहीं” जैसी चर्चाएं आम हो चुकी थीं। डीएम तक पहुंची गोपनीय रिपोर्ट में भी राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे, जिसके बाद यह सख्त फैसला लिया गया।
नए तहसीलदार विक्रम सिंह चाहर ने कार्यभार संभालते ही साफ संकेत दे दिए हैं कि अब “सिस्टम से समझौता नहीं होगा”। बताया जा रहा है कि पहले ही दिन लंबित मामलों की सूची मांगी गई है और पुराने फाइलों की समीक्षा शुरू कर दी गई है। खास तौर पर जमीन से जुड़े विवादों और राजस्व वसूली के मामलों पर फोकस रहेगा।
इस पूरे घटनाक्रम में एक और बड़ा झटका नायब तहसीलदार मनीष वर्मा को भी लगा है, जिन्हें पद से हटा दिया गया। सदर तहसील में भ्रष्टाचार की भारी शिकायतों के बीच अधिवक्ता कई दिनों से हड़ताल पर थे। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह सिर्फ ट्रांसफर नहीं बल्कि “क्लीन-अप ऑपरेशन” की शुरुआत है, जिसमें आने वाले दिनों में और अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
जिले में करीब 65% राजस्व विवाद तहसील स्तर पर ही लंबित रहते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या सदर तहसील की होती है। ऐसे में यह बदलाव सीधे तौर पर हजारों किसानों और आम नागरिकों को प्रभावित करेगा। डीएम के इस एक्शन को “जीरो टॉलरेंस” नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो हाल के दिनों में अवैध प्लाटिंग, भूमाफियाओं और राजस्व घोटालों के खिलाफ चल रहे अभियान से भी जुड़ा हुआ है।
अब नजर इस बात पर टिकी है कि विक्रम सिंह चाहर के नेतृत्व में तहसील सदर की छवि बदलती है या फिर यह कार्रवाई भी महज कागजी साबित होती है। फिलहाल प्रशासन का संदेश साफ है “लापरवाही और भ्रष्टाचार अब बर्दाश्त नहीं होगा।”


