नई दिल्ली। राजधानी की कड़कड़डूमा कोर्ट में तैनात 30 वर्षीय जज अमन कुमार शर्मा ने ग्रीन पार्क स्थित अपने आवास पर कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना उस वक्त सामने आई जब वह अपने ही घर के बाथरूम में लटके हुए पाए गए।
सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शुरुआती जांच में कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिससे मौत के कारणों को लेकर रहस्य और गहरा गया है। पुलिस फिलहाल हर एंगल मानसिक दबाव, निजी कारण और पेशेगत तनाव की जांच में जुटी है।
सूत्रों के मुताबिक, मृतक जज हाल ही में न्यायिक सेवा में आए थे और कड़कड़डूमा कोर्ट में उनकी तैनाती थी। बेहद कम उम्र में जिम्मेदारी का बड़ा दायरा संभाल रहे इस अधिकारी की अचानक मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या न्यायिक सेवा के भीतर बढ़ता दबाव कहीं न कहीं ऐसी घटनाओं को जन्म दे रहा है?
आंकड़ों की बात करें तो देशभर में बीते कुछ वर्षों में न्यायिक अधिकारियों और उच्च दबाव वाले पदों पर कार्यरत लोगों में मानसिक तनाव के मामले तेजी से बढ़े हैं। हालांकि आधिकारिक स्तर पर ऐसे मामलों के विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक नहीं होते, लेकिन बार काउंसिल और मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट्स में “वर्क प्रेशर और इमोशनल स्ट्रेस” को बड़ा कारण माना गया है।
दिल्ली पुलिस ने परिजनों और करीबी सहयोगियों से पूछताछ शुरू कर दी है। मोबाइल कॉल डिटेल, डिजिटल डाटा और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े पहलुओं को खंगाला जा रहा है, ताकि यह साफ हो सके कि यह आत्महत्या किन परिस्थितियों में हुई।


