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Monday, May 18, 2026

न्यूरोसाइंस और गीता के संगम पर हुआ विशेष मंथन

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– सीआईपी स्थापना दिवस समारोह में प्रो. राजकुमार का बरसा अमृतज्ञान

रांची। रांची स्थित सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइकोट्री (सीआईपी ) के स्थापना दिवस समारोह में मानसिक स्वास्थ्य, चेतना और अध्यात्म को लेकर विशेष मंथन देखने को मिला। इस गरिमामयी कार्यक्रम में प्रोफेसर राजकुमार ने “गेस्ट ऑफ ऑनर” के रूप में सहभागिता की, जबकि प्रो. सुनीता शर्मा (डीजीएसएच ) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम का आयोजन सीआईपी के निदेशक डॉ. विजय चौधरी के नेतृत्व में किया गया, जहां देशभर से आए विशेषज्ञों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य और मानव चेतना पर विचार साझा किए।

अपने संबोधन में प्रोफेसर राजकुमार ने कहा कि आधुनिक न्यूरोसाइंस और भारतीय आध्यात्मिक ग्रंथों के बीच गहरा संबंध है। उन्होंने विशेष रूप से भगवद गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव मन, आत्मनियंत्रण, तनाव प्रबंधन और जीवन के संतुलन को समझने का महान स्रोत है।
उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ और तनावपूर्ण जीवनशैली में गीता के विचार मानसिक शांति और सकारात्मक सोच की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम में “स्व” की अवधारणा को न्यूरोसाइंस और धर्म दोनों की दृष्टि से समझने पर विशेष चर्चा हुई, जिसे प्रतिभागियों ने अत्यंत प्रेरणादायक बताया।
प्रो. राजकुमार ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल दवाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसके लिए आध्यात्मिक चेतना, आत्मअनुशासन और सकारात्मक विचार भी उतने ही आवश्यक हैं। उन्होंने युवाओं और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों से भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने और उसे आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने की अपील की।

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