अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे और दान सामग्री को लेकर उठ रहे सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब द्वारा दान की गई चांदी की ‘कागभुसुंडि’ को लेकर नया विवाद सामने आया है। दान लेते वक़्त यह कागभुसुंडि एक समय सार्वजनिक रूप से दिखाई दी थी, और चंपत राय के हाथ मे थी लेकिन अब उसके संबंध में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
यदि चांदी की कागभुसुंडि वास्तव में रामलला को दान में प्राप्त हुई थी, तो उसका रिकॉर्ड कहां है? वह वर्तमान में किसके संरक्षण में है? क्या वह मंदिर के भंडार में सुरक्षित है अथवा किसी अन्य स्थान पर रखी गई है? इन सवालों के जवाब अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी वाली तस्वीरों के सामने आने के बाद श्रद्धालुओं के बीच चर्चा और तेज हो गई है। आस्था से जुड़े इस विषय पर लोग पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि रामलला को अर्पित हर दान करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा होता है, इसलिए उसका पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक होना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि दान की गई वस्तु का रिकॉर्ड मौजूद है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा? और यदि रिकॉर्ड नहीं है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
राम मंदिर करोड़ों सनातनियों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दान की गई सामग्री को लेकर उठ रहे हर सवाल का तथ्यात्मक और पारदर्शी उत्तर देना आवश्यक है। श्रद्धालु जवाब चाहते हैं, क्योंकि आस्था के साथ किसी भी प्रकार की अस्पष्टता अविश्वास को जन्म देती है।


