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Tuesday, March 24, 2026

फर्जी फर्मों को बना कर जीएसटी चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड,1.68 करोड़ जीएसटी चोरी का खुलासा।

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-फर्जी ई-वे बिल से तंबाकू कारोबार, कई राज्यों तक फैला नेटवर्क, कार बनी फर्जी फर्म का दफ्तर

कायमगंज/फर्रुखाबाद
22/मार्च/2026

कस्बे में फर्जी फर्मों के जरिए सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस और जीएसटी विभाग की संयुक्त जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी चलती हुई कार के भीतर बैठकर फर्जी ई-वे बिल और इनवॉयस काटने का काला कारोबार कर रहे थे। पुलिस ने इस मामले में तीन मुख्य आरोपितों को दबोच लिया है।
केंद्रीय व राज्य कर विभाग के अधिकारियो द्वारा 19 मार्च को वाहन चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध कार को रोका गया। गाड़ी में सवार अरबाज अली व फैसल निवासीगण मऊरशीदाबाद और अमन निवासी करीमनगर से जब पूछताछ की गई, तो उनके पास से अमन ट्रेडिंग और सुपर इंटरप्राइजेज, एके ट्रेडर्स आदि फर्मों के दस्तावेज और बिल बुक बरामद हुए। जब इनके मोबाइल खंगाले गए, तो उनमें यूनिक इण्टर प्राइजेज, नोहा टुबैको कम्पनी, स्टार इंटर प्राइजेज, अरीवा ट्रेडिंग कम्पनी, एके ट्रेडर्स, अमन ट्रेडिंग कम्पनी, यदुवंशी ट्रेडर्स, असर ट्रेडर्स, डीलक्स ट्रेडिंग उद्योग, आलम ट्रेडर्स आदि फर्मों की ईमेल आईडी लॉगिन मिलीं और व्हाट्सएप पर फर्जी ई-वे बिलों के लेन-देन के पुख्ता साक्ष्य मिले।जीएसटी विभाग की टीम ने पुलिस के साथ जब आरोपितों द्वारा बताई गई फर्मों के पतों पर छापेमारी की, तो अधिकारी भी दंग रह गए। नोहा टुबैको और अमन ट्रेडिंग के पते पर शान मियाँ वारसी फर्नीचर हाउस का बोर्ड लगा मिला और अंदर ताला लटका था। वहीं, स्टार इंटरप्राइजेज के पते पर बने मकान में स्थानीय लोगों ने बताया कि वहां कभी व्यापार हुआ ही नहीं, बल्कि उसमें सालों से भूसा भरा हुआ है। पूछताछ में आरोपियों ने कबूला कि वे केवल निरीक्षण के समय बैनर लगाकर फोटो खिंचवाते थे और फिर उसे हटा देते थे। मुख्य आरोपित अरबाज अली ने बताया कि वह गांव के भोले-भाले लोगों को 25 हजार रुपये महीना देने का लालच देकर उनके आधार और पैन कार्ड ले लेता था। उन्हीं के नाम पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराया जाता था। इसके बदले गिरोह के मास्टरमाइंड जेल जा चुके जुबैर और उसके साथी इन्हें मोटी रकम देते थे। यह गिरोह तंबाकू व्यापारियों से मिलकर बिना माल भेजे केवल कागज पर खरीद-बिक्री दिखाता था। फर्जी ई-वे बिलों के सहारे ट्रांसपोर्टर मोटा भाड़ा वसूलते थे। अगर कोई ड्राइवर बिना चेकिंग के समय से पहले गाड़ी ठिकाने पर पहुंचा देता, तो उसे 1000 रुपये का इनाम भी दिया जाता था। इस पूरे खेल से सरकार को अब तक करोड़ों रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट की चपत लगाई जा चुकी है।जिसमें नोहा टुबैको कम्पनी 63.05 लाख, अमन ट्रेडिंग कम्पनी 54,08,747, एके ट्रेडर्स 43,98,000, यदुवंशी ट्रेडर्स 6,80,102 शामिल है। आरोपियों ने कुबूला कि जब भी विभाग किसी फर्म को पकड़ता, तो वे अपने वकील के जरिए उसे कानूनी दांव-पेच में उलझा देते थे और फौरन नई फर्म खोल लेते थे। पुलिस ने कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी और राजस्व क्षति की धाराओं में
फैजल अहमद खाँ निवासी मऊरशीदाबाद, हुमैर खाँ निवासी कलाखेल, सैयद अरबाज अली निवासी कोट मऊरशीदाबाद, मो. आमिर निवासी चिलाका, अमन खान निवासी करीम नगर,
सत्यम यादव निवासी लेखराजपुर किशनीपुर सुगाँव, जनपद मैनपुरी, अरबाज निवासी सुभानपुर, अयान अली निवासी हाजी कॉलोनी, दक्षिण दिल्ली,
जुबैर खाँ गढ़ी गिर्द, सुखवीर सिंह निवासी रुटौल, तालिब उर्फ तारिक,
आशीष, अदनान, सब्दर निवासी चौक सब्दर, फतेहगढ़, अफसर खाँ निवासी लालबाग, फुरकान निवासी मऊरशीदाबाद, समीर व आवेश उर्फ नन्हे निवासीगण कुबेरपुर,
प्यारे मियां, विकास,
लकी गुप्ता, आदित्य उर्फ टिल्लू, बिलाल, अंकित सक्सेना वकील, अमन खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना आरोपी लग्जरी लाइफ जीने के लिए फर्जी फर्मों का जाल बुनते थे। उनके पास से बरामद मोबाइल और दस्तावेजों की गहनता से जांच की जा रही है। इस गिरोह में शामिल अन्य व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों को भी जल्द रडार पर लिया जाएगा

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