संभल
एलपीजी गैस सिलेंडर की आपूर्ति में देरी और केवाईसी (KYC) अधूरी होने के कारण उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग गैस एजेंसियों से बिना सिलेंडर के लौटने को मजबूर हैं, जबकि कुछ परिवारों को गैस खत्म होने के बाद चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, ओटीपी (OTP) मिलने के बाद भी सिलेंडर की डिलीवरी में 8 से 10 दिन तक का समय लग रहा है। शहरी क्षेत्रों में गैस बुकिंग के बाद लगभग 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे उपभोक्ताओं की दैनिक जीवनचर्या पर सीधा असर पड़ रहा है।
जिले में करीब 20,000 ऐसे उपभोक्ता हैं जिन्होंने पिछले दो-तीन वर्षों से अपनी केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं कराई है। इस वजह से उनकी बुकिंग लंबित पड़ी है और उन्हें गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। एजेंसियों द्वारा बार-बार केवाईसी अपडेट कराने की अपील की जा रही है, लेकिन कई उपभोक्ता अब भी इससे अनजान या लापरवाह बने हुए हैं।
कमर्शियल सिलेंडर की कमी का असर छोटे व्यापारियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। होटल संचालक और चाट-पकौड़ी बेचने वाले दुकानदार गैस न मिलने के कारण परेशान हैं। संभल कोतवाली क्षेत्र में संचालित 8 गैस एजेंसियां शहरी और आसपास के 50 से अधिक गांवों को सेवा देती हैं, लेकिन आपूर्ति में देरी के कारण कई व्यवसायियों ने कोयला भट्टी का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
हालांकि, जिला पूर्ति अधिकारी शिवि गर्ग का कहना है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है। उनके अनुसार सभी गैस एजेंसियों पर पर्याप्त मात्रा में एलपीजी और कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध हैं, और आपूर्ति सुचारू रूप से की जा रही है।
जनपद में कुल 39 गैस एजेंसियां कार्यरत हैं, जिनसे 5 लाख से अधिक उपभोक्ता जुड़े हुए हैं। इनमें प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लगभग 2 लाख लाभार्थी और करीब 750 कमर्शियल उपभोक्ता शामिल हैं। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं की समस्याएं बनी हुई हैं, जिससे प्रशासनिक दावों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर साफ नजर आ रहा है।


