बरेली
ट्रांसपोर्ट नगर में वाहन फिटनेस जांच को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि संभागीय निरीक्षक (आरआई) ने मात्र 25 मिनट में 35 वाहनों की फिटनेस जांच पूरी कर दी। इस हिसाब से एक वाहन पर औसतन 42 सेकंड का समय दिया गया, जो मानकों के अनुरूप जांच के लिए बेहद कम माना जा रहा है।
इतने कम समय में वाहन की चेसिस और इंजन नंबर का दस्तावेजों से सही मिलान करना भी मुश्किल है, जबकि फिटनेस जांच में ब्रेक, लाइट, प्रदूषण और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच जरूरी होती है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जांच प्रक्रिया कितनी गंभीरता से की गई होगी।
मामले की पड़ताल के दौरान सामने आया कि ट्रांसपोर्ट नगर में दोपहर बाद वाहनों की लंबी कतार लगती है और आरआई के आने के बाद जल्दबाजी में जांच प्रक्रिया पूरी की जाती है। वहीं बिथरी चैनपुर स्थित स्वचालित परीक्षण केंद्र पर भी संदिग्ध गतिविधियां देखने को मिलीं, जहां कुछ वाहन कथित रूप से “सिंडिकेट” के जरिए प्राथमिकता से अंदर भेजे जा रहे थे।
वाहन मालिकों ने दलालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फिटनेस जल्दी और आसानी से कराने के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है। कुछ मामलों में बाहरी व्यक्तियों द्वारा 10 हजार रुपये तक लेने की बात सामने आई है। इससे व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हालांकि, एआरटीओ प्रशासन प्रवेश कुमार सरोज ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बाहरी व्यक्तियों का व्यवस्था में कोई हस्तक्षेप नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वसूली के आरोपों की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जिले में स्कूली वाहनों की निगरानी को लेकर भी स्थिति चिंताजनक है। यूपी-आईएसवीएमपी पोर्टल पर अब तक केवल 450 बसों का ही विवरण अपलोड किया गया है। प्रशासन ने इसे अनिवार्य करते हुए स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण और सत्यापन वाले वाहनों को वैध नहीं माना जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और नियमों में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


