2025-26 में 11,810 करोड़ रूपये से अधिक व्यय, वंचित वर्गों के उत्थान को मिली नई रफ्तार
नई दिल्ली। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे अधिक खर्च दर्ज कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में कुल ₹11,810.82 करोड़ की राशि विभिन्न योजनाओं पर खर्च की गई, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी न केवल आंकड़ों में इजाफा दर्शाती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि केंद्र सरकार समाज के कमजोर, वंचित और जरूरतमंद वर्गों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लगातार मजबूत कर रही है।
मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने यह खर्च समयबद्ध और प्रभावी तरीके से योजनाओं के क्रियान्वयन पर किया है। सरकार का कहना है कि इस रिकॉर्ड व्यय से यह सुनिश्चित हुआ है कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी स्तर पर संसाधनों की कमी बाधा न बने।
खास तौर पर अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं पर इस वर्ष विशेष फोकस किया गया है। छात्रवृत्ति, कौशल विकास, शिक्षा सहायता, आवास और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाओं में अधिक धनराशि खर्च कर इन वर्गों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए गए हैं। इससे आने वाले समय में इन वर्गों की जीवन गुणवत्ता में सुधार और अवसरों की समानता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
इसके अलावा मंत्रालय ने नशा मुक्ति अभियान (ड्रग डिमांड रिडक्शन) के तहत जागरूकता और पुनर्वास कार्यक्रमों को विस्तार दिया है। सफाई कर्मचारियों के कल्याण के लिए विशेष योजनाएं लागू की गई हैं, जिनमें स्वास्थ्य सुरक्षा, बीमा और रोजगार से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। वहीं वरिष्ठ नागरिकों के लिए देखभाल और सहायता सेवाओं को मजबूत किया गया है, ताकि उन्हें सम्मानजनक जीवन मिल सके।
ट्रांसजेंडर समुदाय के सशक्तिकरण के लिए भी मंत्रालय ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। साथ ही भिक्षावृत्ति में संलग्न लोगों के पुनर्वास के लिए योजनाओं का विस्तार कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह रिकॉर्ड खर्च केवल बजट का उपयोग नहीं, बल्कि सरकार की उस व्यापक सोच का प्रतीक है, जिसमें समाज के हर वर्ग को समान अवसर देने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत को जमीन पर उतारने के लिए यह प्रयास लगातार जारी रहेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी जारी रही, तो आने वाले वर्षों में सामाजिक असमानता कम करने और आर्थिक सशक्तिकरण को गति देने में यह एक अहम भूमिका निभा सकता है।


