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Saturday, April 4, 2026

ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों ने बदली युद्ध की तस्वीर

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अमेरिका-इजरायल के एयर डिफेंस पर भारी दबाव—वैश्विक शक्ति संतुलन पर बड़ा असर

 

 

 

तेहरान। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता के दम पर आधुनिक युद्ध की परिभाषा को चुनौती दे दी है। हालात यह हैं कि अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों के अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भी ईरानी मिसाइलों के सामने पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हो पा रहे हैं। इससे वैश्विक स्तर पर सैन्य रणनीतियों और शक्ति संतुलन को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

जानकारी के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक 12,500 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए हैं। इसके बावजूद खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि ईरान की 50 प्रतिशत से अधिक मिसाइल क्षमता अब भी बरकरार है, जो यह दर्शाता है कि वह लंबे समय तक युद्ध लड़ने की स्थिति में है। ईरान की मिसाइलों ने संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, बहरीन और इजरायल जैसे देशों में भारी तबाही मचाई है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिबंधों के चलते मजबूत वायुसेना विकसित न कर पाने के बावजूद ईरान ने बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों तथा ड्रोन तकनीक के जरिए युद्ध को एक नई दिशा दी है। ईरान ने अपनी मिसाइल शक्ति को केवल हमले के हथियार के रूप में नहीं, बल्कि ‘रणनीतिक निवारक’ के तौर पर विकसित किया है, जो दुश्मन को हमले से पहले कई बार सोचने पर मजबूर करता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के पास 3,000 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों का विशाल भंडार है, जो मध्य पूर्व में सबसे बड़ा माना जाता है। इनमें मध्यम दूरी की मिसाइलें—जैसे खुर्रमशहर, इमाद और सज्जील—1500 से 2000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम हैं। वहीं ‘फतह’ जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें 15 मैक की रफ्तार से उड़ान भर सकती हैं, जो किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती मानी जाती हैं।

इसके अलावा, ज़ुल्फ़िकार, देजफुल, हाजी कासिम और खैबर शिकन जैसी कम दूरी और टैक्टिकल मिसाइलें भी ईरान के हथियारों का अहम हिस्सा हैं। इन मिसाइलों की सबसे बड़ी खासियत इनके मोबाइल लॉन्चर हैं, जो इन्हें तेजी से तैनात और फायर करने के बाद तुरंत स्थान बदलने की क्षमता देते हैं, जिससे दुश्मन के जवाबी हमलों से बचना आसान हो जाता है।

दूसरी ओर, इजरायल और अमेरिका द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम—जैसे THAAD, पैट्रियट, डेविड्स स्लिंग और आयरन डोम—पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। इन सिस्टम्स को ऑपरेट करना बेहद महंगा है और इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक भी तेजी से घट रहा है। ऐसे में ईरान की अपेक्षाकृत कम लागत वाली मिसाइल रणनीति उसे रणनीतिक बढ़त दिला रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो ईरान की मिसाइल क्षमता पूरे मध्य पूर्व में बड़े स्तर पर तबाही मचा सकती है, जिसकी भरपाई वर्षों तक संभव नहीं होगी। यह स्थिति न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि वैश्विक राजनीति और रक्षा नीतियों पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकती है।

कुल मिलाकर, ईरान ने अपनी मिसाइल और ड्रोन रणनीति के जरिए यह साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध केवल बड़ी सेनाओं या अत्याधुनिक वायुसेना पर निर्भर नहीं रह गया है, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्रभावी रणनीति से भी बड़ी शक्तियों को चुनौती दी जा सकती है।

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