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Saturday, April 4, 2026

केरल में पीएम मोदी का विपक्ष पर तीखा हमला, खाड़ी देशों को लेकर कांग्रेस पर भड़काऊ राजनीति का आरोप

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तिरुवल्ला/केरल। नरेंद्र मोदी ने केरल में चुनावी माहौल के बीच विपक्ष पर जोरदार हमला बोलते हुए कांग्रेस पार्टी और लेफ्ट दलों की मंशा पर सवाल उठाए। तिरुवल्ला में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे बयान दे रही है, जिससे खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस केवल उन्हें गाली देने और चुनावी फायदा लेने के लिए देशहित को दांव पर लगाने से भी पीछे नहीं हट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल चाहते हैं कि पश्चिम एशिया के देश भारत को अपना दुश्मन समझें, जिससे वहां काम कर रहे भारतीयों को मुश्किलों का सामना करना पड़े। पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा कि उनके लिए विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सरकार इस दिशा में पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने एलडीएफ और यूडीएफ पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ये दल झूठ और भ्रम फैलाने की राजनीति कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन देश और देशवासियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने सबरीमाला मंदिर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण के तार कांग्रेस नेतृत्व से जुड़े हैं और लेफ्ट सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच से बच रही है। उन्होंने कहा कि केरल की आस्था और संस्कृति को नुकसान पहुंचाने में कांग्रेस और वामपंथी दलों की भूमिका रही है।

इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि झूठ फैलाना कांग्रेस और वामपंथियों की आदत बन चुकी है। उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे मुद्दों पर भी विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब-जब सच्चाई सामने आती है, तब-तब विपक्ष उसे झूठ बताकर जनता को गुमराह करने की कोशिश करता है।

चुनावी माहौल में प्रधानमंत्री का यह भाषण सियासी रूप से काफी अहम माना जा रहा है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि केरल में इस बार चुनावी मुकाबला और ज्यादा तीखा होने वाला है, जहां राष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम भी राजनीतिक बहस का केंद्र बनते नजर आ रहे हैं।

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