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Saturday, April 4, 2026

जमीन पर ‘रिपोर्ट का खेल’: माफिया गुट के पक्ष से पलटी राजस्व टीम

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– माफिया कनेक्शन के आरोपों से मचा हड़कंप
– डीएम समेत सभी जिम्मेदारों के खिलाफ हाई कोर्ट में अवमानना की तैयारी
फर्रुखाबाद। तहसील सदर क्षेत्र के ग्राम अमेठी जदीद में भूमि पर कब्जे के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। शिकायतकर्ता रामपाल सिंह पुत्र पाती राम के पक्ष में पहले राजस्व विभाग द्वारा दी गई रिपोर्ट के बाद अचानक रिपोर्ट बदलने से पूरे मामले में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित का आरोप है कि दबंग और कथित रूप से बाहुबली नेटवर्क से जुड़े लोगों के प्रभाव में आकर राजस्व विभाग ने अपनी ही रिपोर्ट पलट दी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में राजस्व विभाग ने शिकायतकर्ता के दावों को सही मानते हुए कब्जा हटाने की संस्तुति की थी। तहसीलदार सदर द्वारा चार सदस्यीय टीम गठित कर मौके का निरीक्षण कराया गया था,और भूमि से अतिक्रमण हटाने के आदेश भी दिए गए थे। लेकिन इसके बाद घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। आरोप है कि बाद में उसी विभाग ने अपनी रिपोर्ट बदलकर कथित दबंगों के पक्ष में कर दी।
पीड़ित रामपाल सिंह का कहना है कि जिन लोगों पर भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप है, उनमें स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली माने जाने वाले सपा नेता और पूर्व विधायक विजय सिंह के करीबी राजा शमसी और फाईक शमसी के नाम सामने आ रहे हैं। साथ ही आरोप लगाया गया है कि इनका संबंध बाहुबली माफिया अनुपम दुबे और सपा विधायक विजय सिंह के करीबी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है, जिसके चलते प्रशासनिक स्तर पर दबाव बनाकर रिपोर्ट बदली गई।
मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि पहले राजस्व अभिलेखों और टीम की जांच में जिस भूमि को कब्ज़ा दर्ज बताया गया, उसी पर बाद में कब्जाधारियों को राहत देने जैसी स्थिति बन गई। पीड़ित का आरोप है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से की गई कार्रवाई है, जिसमें प्रभाव और दबाव की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इतना ही नहीं, पूरे घटनाक्रम को लेकर अब मामला उच्च न्यायालय तक पहुंच गया है। पीड़ित ने जिलाधिकारी समेत संबंधित राजस्व अधिकारियों के खिलाफ अवमानना का प्रकरण उठाते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में पत्राचार किया है। उनका कहना है कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया और उल्टा रिपोर्ट बदलकर दोषियों को संरक्षण देने का प्रयास किया गया।
गांव में इस मुद्दे को लेकर आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी जमीन पर ही इस तरह का खेल होगा, तो आम आदमी को न्याय कैसे मिलेगा। राजस्व विभाग की कार्यशैली और पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से आरोपों की गंभीरता बढ़ रही है, उससे यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।

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