जिला संवाददाता
बकेवर/ इटावा | इटावा जनपद के थाना बकेवर क्षेत्र स्थित अहेरीपुर गैस एजेंसी पर हुए विवाद ने अब न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला अब सिर्फ मारपीट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह इस बात का प्रतीक बनता जा रहा है कि क्या आम उपभोक्ता की आवाज दबाई जा रही है? पीड़ित गैस उपभोक्ता शिवम कुमार पुत्र विश्वनाथ, निवासी ग्राम अहेरीपुर, ने पुलिस महानिदेशक को दिए अपने प्रार्थना पत्र में स्पष्ट आरोप लगाया है कि 01 अप्रैल 2026 को वह इंडेन गैस सिलेंडर बुक कराने एजेंसी पहुंचा था। आरोप है कि एजेंसी संचालक के बेटे द्वारा उसे ओटीपी दिखाने के बहाने बुलाया गया और मौके पर पहुंचते ही उसके साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी गई।
पीड़ित के अनुसार, विरोध करने पर उसे जातिसूचक गालियां दी गईं और संचालक व उसके बेटे ने मिलकर लात-घूंसों से मारपीट की। इतना ही नहीं, आरोप है कि उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई और कहा गया कि जहां भी जाओगे, तुम्हारा विवाद खड़ा कर देंगे। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू पुलिस की भूमिका बनकर सामने आया है।
“शिकायतकर्ता ही बना आरोपी” पीड़ित का आरोप है कि उसने खुद पुलिस को सूचना दी, लेकिन थाना बकेवर पुलिस ने उल्टा गैस एजेंसी संचालक की तरफ से ही उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया। इस कार्रवाई ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। जबकि प्राप्त जानकारी के अनुसार पहले से विवादित रहे आरोपी? स्थानीय सूत्रों और पीड़ित पक्ष का दावा है कि संबंधित लोगों पर पहले भी मिनी गुंडा एक्ट, मारपीट और भय का माहौल बनाने जैसे मामलों में कार्रवाई हो चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पुलिस ने इन तथ्यों को नजरअंदाज किया? जनता में आक्रोश, उठे तीखे सवाल उठ रहे है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोग खुलकर कह रहे हैं कि अगर पीड़ित को ही आरोपी बना दिया जाएगा, तो आम जनता न्याय के लिए कहां जाएगी?
क्या पुलिस निष्पक्ष जांच कर रही है या दबाव में काम कर रही है? क्या यह मामला “उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” की कहावत को सच साबित कर रहा है? क्या प्रभावशाली लोगों के सामने कानून कमजोर पड़ रहा है? उच्च स्तर तक जाएगी लड़ाई? पीड़ित ने अपने प्रार्थना पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उसे न्याय नहीं मिला और निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो वह इस मामले को उच्च अधिकारियों तक ले जाएगा। साथ ही उसने अपनी जान-माल की सुरक्षा की भी मांग की है। यह मामला अब केवल एक गैस एजेंसी विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह आम नागरिक के अधिकार, पुलिस की निष्पक्षता और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता की परीक्षा बन गया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाता है… या फिर यह मामला भी सवालों के बोझ तले दबकर रह जाएगा।


