लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीएम हेल्पलाइन 1076 से जुड़े कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए बड़ा हस्तक्षेप किया, जिसके बाद लंबे समय से चल रहा वेतन विवाद सुलझ गया। कर्मचारियों द्वारा वी-विन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ वेतन और कार्यस्थल की समस्याओं को लेकर की गई शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने तुरंत संज्ञान लिया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि कर्मचारियों के वेतन संबंधी मुद्दों और कार्यस्थल पर मौजूद खामियों का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए। उनके निर्देश पर यूपीडेस्को (UPDESCO) की प्रबंध निदेशक नेहा जैन को पूरे मामले की गहन समीक्षा कर कंपनी स्तर पर सुधारात्मक कार्रवाई कराने के आदेश दिए गए। साथ ही यह भी निर्देशित किया गया कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री स्तर से हस्तक्षेप होते ही प्रशासनिक स्तर पर तेजी आई और यूपीडेस्को द्वारा संबंधित कंपनी के शीर्ष प्रबंधन के साथ उच्चस्तरीय वार्ता शुरू की गई। इस वार्ता के दौरान कंपनी को कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत कराया गया, जिसके बाद कंपनी ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया।
कंपनी प्रबंधन ने कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि पर सहमति जताई है। इसके अलावा कार्यस्थल की सुविधाओं में सुधार करने का भी आश्वासन दिया गया है, जिससे कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण मिल सकेगा। इस फैसले के बाद लंबे समय से असंतोष झेल रहे कर्मचारियों में खुशी का माहौल है।
यूपीडेस्को की प्रबंध निदेशक नेहा जैन ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की गई है और कंपनी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों की सभी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि अब स्थिति सामान्य हो चुकी है और सभी कर्मचारी अपने कार्य पर लौट आए हैं।
वहीं, कर्मचारियों ने भी मुख्यमंत्री के इस हस्तक्षेप के लिए आभार व्यक्त किया है। कर्मचारी हिमांशु विक्रम ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना और तत्काल समाधान दिलाया जाना उनके लिए बड़ी राहत है। विकास यादव ने भी कहा कि वेतन वृद्धि के निर्णय के बाद सभी कर्मचारी संतुष्ट हैं और अब पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री के त्वरित हस्तक्षेप से न केवल एक बड़ा विवाद सुलझा, बल्कि कर्मचारियों को उनका अधिकार भी मिला, जिससे प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही का उदाहरण देखने को मिला है।


