लखनऊ। राजधानी के गिरजाघरों में गुड फ्राइडे परंपरागत श्रद्धा और शांति के माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर यीशु मसीह के बलिदान को याद करते हुए विशेष प्रार्थनाएं की गईं और कई स्थानों पर उनके प्रतीक को सूली पर चढ़ाकर जुलूस निकाला गया। श्रद्धालुओं ने विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना की।
हजरतगंज समेत विभिन्न क्षेत्रों के चर्चों में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गए थे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु गिरजाघरों में एकत्र हुए और ईसा मसीह के कष्टों को याद कर भावुक हो उठे। कई जगहों पर झांकियों और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से उनके जीवन के अंतिम क्षणों को दर्शाया गया।
फादर मॉरिस ने बताया कि गुड फ्राइडे ईसाई धर्म का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इसी दिन यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था और उन्होंने मानवता के कल्याण के लिए अपने प्राण त्याग दिए। उन्होंने कहा कि यह दिन खुशी का नहीं, बल्कि गहरे शोक और आत्मचिंतन का अवसर होता है।
गुड फ्राइडे की पूर्व संध्या से ही चर्चों में प्रार्थनाओं का दौर शुरू हो जाता है। इस दिन कई श्रद्धालु उपवास रखते हैं और सादगी के साथ दिन बिताते हैं। विशेष प्रार्थना सभाओं में लोग ईसा के त्याग और प्रेम के संदेश को याद करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुड फ्राइडे के दिन ईसा मसीह को क्रूस पर चढ़ाया गया था। उनके बलिदान को मानवता के लिए सर्वोच्च त्याग माना जाता है। इसी कारण इस दिन को पवित्र और गंभीरता से मनाया जाता है। इसे कुछ स्थानों पर ‘ब्लैक फ्राइडे’ या ‘होली फ्राइडे’ के नाम से भी जाना जाता है।
इस बार ईस्टर 5 अप्रैल, रविवार को मनाया जाएगा, जो यीशु के पुनर्जीवन का प्रतीक है। गुड फ्राइडे उसी से पहले आता है और यह शोक से आशा की ओर बढ़ने का संदेश देता है।


