इटावा। जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम दिन मंगलवार को सरकारी विभागों में बजट खपाने की होड़ ने कोषागार कार्यालय की रफ्तार बढ़ा दी। सरकारी धन के लैप्स होने के डर से विभागों के अधिकारी और कर्मचारी दिनभर बिल पास कराने में जुटे रहे। सुबह से लेकर देर रात तक कोषागार कार्यालय में चहल-पहल और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
इस वित्त वर्ष में शासन की ओर से समाज कल्याण विभाग को 18.37 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था, जिसमें से विभाग ने 16.88 करोड़ रुपये खर्च किए और लगभग 1.49 करोड़ रुपये सरेंडर कर दिए। जिला कोषागार कार्यालय में अंतिम दिन लगभग 260 बिलों का भुगतान किया गया, जिसमें लगभग 900 खातों के माध्यम से 14 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन शामिल था।
विभागों की खर्च संबंधी स्थिति इस प्रकार रही:
पुलिस विभाग को 2.14 अरब रुपये का बजट मिला, जिसमें 2.10 अरब खर्च हुए और लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये सरेंडर किए गए।
होमगार्ड विभाग को 18 करोड़ का बजट मिला, जिसे पूरी तरह खर्च किया गया।
लोक निर्माण विभाग को 30.73 करोड़ मिले, जिसमें से 30.71 करोड़ खर्च किए गए।
सिंचाई विभाग ने 71 करोड़ में से लगभग 68 करोड़ खर्च किए।
जिला अस्पताल पुरुष को 30.48 करोड़ का बजट मिला, जिसमें से 30.03 करोड़ खर्च किए गए।
जिला अस्पताल महिला को 8.52 करोड़ में से लगभग आठ करोड़ खर्च किए गए।
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने 37 करोड़ में से लगभग 35 करोड़ खर्च किए।
बेसिक शिक्षा विभाग को 6.37 अरब का बजट मिला, जिसमें से 6.32 अरब खर्च किए गए।
वन विभाग और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने अपने बजट का लगभग पूरा उपयोग किया।
सहायक कोषाधिकारी मनोज कुमार, अनीता सक्सेना, वरिष्ठ लेखाकार सुदीप त्रिपाठी, प्रदीप शर्मा, राम कुमार, प्रदीप चौधरी, लेखाकार अरुण कुमार और सतेंद्र ने अंतिम दिन कोषागार कार्यालय में पूरी मेहनत के साथ बजट खपत प्रक्रिया को पूरा किया।
अधिकारी बताते हैं कि वित्त वर्ष के अंतिम दिन ऐसी होड़ आम होती है, लेकिन इस बार देर रात तक 14 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन और लगभग 260 बिलों का भुगतान यह दर्शाता है कि विभागों ने बजट को अधिकतम उपयोग करने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी।
यह घटना एक बार फिर यह साफ कर देती है कि सरकारी विभागों में बजट खपत की प्रक्रिया और समय प्रबंधन महत्वपूर्ण है, ताकि वर्ष के अंत में धन का उचित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुँच सके।


