अनुराग तिवारी
औरैया। जिले में अग्नि सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। शहर से लेकर कस्बों तक दर्जनों नहीं बल्कि सैकड़ों हॉस्पिटल, होटल, कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी और छोटी फैक्ट्रियां बिना फायर सर्विस NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) के ही संचालित हो रही हैं, लेकिन अग्निशमन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
सूत्रों के अनुसार, कई निजी अस्पतालों में न तो फायर एक्सटिंग्विशर की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही आपातकालीन निकासी (Emergency Exit) का कोई स्पष्ट इंतजाम। होटल और गेस्ट हाउसों में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं, जहां आग लगने की स्थिति में मेहमानों की जान सीधे खतरे में पड़ सकती है।
कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी जैसे स्थान, जहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं रोजाना जुटते हैं, वहां भी सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। तंग गलियों में चल रहे इन संस्थानों में अग्निशमन वाहन तक पहुंच पाना मुश्किल है, जिससे खतरा और भी बढ़ जाता है।
वही स्थानीय लोगों का आरोप है कि अग्निशमन विभाग सब कुछ जानते हुए भी आंख मूंदे बैठा है। कई स्थानों पर तो बिना किसी निरीक्षण के ही संचालन जारी है, जिससे विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा यह भी है कि कुछ संस्थानों को संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते कार्रवाई नहीं की जा रही। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो औरैया में भी किसी बड़े अग्निकांड से इंकार नहीं किया जा सकता। पूर्व में देश के कई शहरों में फायर सेफ्टी की अनदेखी के चलते दर्दनाक हादसे हो चुके हैं, जिनसे सबक लेने की जरूरत है। औरैया जिले भर में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था कागजों तक सिमटती नजर आ रही है। अगर समय रहते प्रशासन नहीं चेता, तो यह लापरवाही किसी दिन बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी जागते हैं या फिर किसी हादसे के बाद ही कार्रवाई होगी।


