मुरादाबाद। चर्चित मैनाठेर कांड में सजा पाए तीन दोषियों ने खुद को नाबालिग बताकर पुलिस और अदालत को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जांच में उनकी सच्चाई सामने आ गई। दस्तावेजों की पड़ताल और मेडिकल परीक्षण में तीनों के बालिग होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद उन्हें अन्य आरोपियों के साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
दरअसल, मैनाठेर बवाल के दौरान डीआईजी पर हमले समेत कई गंभीर मामलों में कुल 16 लोगों को उम्रकैद की सजा मिली है। इनमें दो सगे भाई समेत तीन दोषियों के परिजनों ने उम्र से जुड़े दस्तावेज पेश कर उन्हें नाबालिग बताया था, जिसके चलते मामला किशोर न्यायालय भेजा गया।
कोर्ट के आदेश पर जब दस्तावेजों की गहन जांच की गई तो वे फर्जी पाए गए। इसके बाद मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें तीनों के वयस्क होने की पुष्टि हुई। सच्चाई सामने आने के बाद उनकी फाइल फिर से एडीजे कोर्ट में भेजी गई।
यह मामला छह जुलाई 2011 का है, जब मैनाठेर के असालतनगर बघा गांव में बवाल की सूचना पर जा रहे डीआईजी अशोक कुमार सिंह और उनके पीआरओ पर भीड़ ने हमला कर दिया था। हमलावरों ने पिस्टल छीन ली और मोबाइल भी लूट लिया था, जिसके बाद कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों को सजा सुनाई। इस फैसले को कानून व्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है, वहीं फर्जी दस्तावेज पेश कर न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश पर भी सख्त संदेश गया है।


