इटावा। जिले के आयुर्विज्ञान विवि के मानसिक रोग विभाग में 18 मार्च को सामने आए एक गंभीर दुष्कर्म मामले में पीड़िता के स्वास्थ्य को देखते हुए उसका गर्भपात कराने पर विचार किया जा रहा है। विवि की जांच टीमों की रिपोर्ट में इस कदम की सिफारिश की गई है और अब इस संबंध में कोर्ट में आवेदन दिया जाएगा।
आयुर्विज्ञान विवि की कार्य परिषद की बैठक में 18 मार्च को संज्ञान में आए इस दुष्कर्म मामले पर चर्चा की गई। बैठक में यह भी तय किया गया कि महिला के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उसके गर्भपात की प्रक्रिया केवल कोर्ट के आदेशानुसार ही आगे बढ़ाई जाएगी। मेडिकल जांच टीम की रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता 16 सप्ताह और पांच दिन की गर्भवती हैं और उनकी उम्र लगभग 35 वर्ष बताई गई है।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि मामले की पूरी विभागीय जांच और आगे की कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए। जांच अधिकारी के तौर पर सीएमएस प्रो. डॉ. एसपी सिंह और प्रस्तुतकर्ता अधिकारी राजकुमार सचवानी को नियुक्त किया गया है। बैठक में लीगल सदस्य को शामिल करने की सलाह भी दी गई, जिस पर विवि प्रबंधन ने बताया कि हाईकोर्ट के लीगल एडवाइजर पहले से ही इस कमेटी के साथ हैं।
सैफई पुलिस भी इस मामले की सक्रियता से जांच कर रही है। शुक्रवार को कानपुर से बुलाई गई 40 साल की अनुभवी अनुवादक की मदद से पीड़िता का बयान दर्ज कराया गया। पीड़िता ने आरोपी का फोटो देखते ही उसे पहचान लिया और इशारे से तीन अंगुलियां उठाकर रोते हुए बताया कि उसके साथ सफाई कर्मी ने तीन बार आपराधिक कृत्य किया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पीड़िता का आईक्यू स्तर 38 प्रतिशत है, जबकि सामान्य व्यक्ति का स्तर 75 प्रतिशत होता है। विशेषज्ञों ने बताया कि यह स्तर सामान्य से लगभग आधा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पीड़िता मानसिक रूप से कमजोर स्थिति में थी और उसके साथ हुए अपराध की गंभीरता और भी बढ़ जाती है।
आयुर्विज्ञान विवि ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 19 मार्च को विभागाध्यक्ष एके मिश्रा की तहरीर पर सैफई थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। उसी दिन आरोपी रविंद्र वाल्मीकि को गिरफ्तार कर लिया गया और उसका डीएनए सैंपल आगरा फॉरेंसिक लैब भेजा गया। विवि ने मामले की जांच के लिए नौ सदस्यीय जांच टीम, आंतरिक टीम और एक स्वास्थ्य जांच टीम गठित की थी, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट कार्य परिषद को सौंप दी।
कार्य परिषद ने बैठक में सभी रिपोर्टों पर विचार करते हुए यह निर्णय लिया कि पीड़िता के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उसका गर्भपात कराने के लिए कोर्ट में आवेदन किया जाएगा। कोर्ट के आदेश के बाद ही आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
विवि प्रबंधन ने कहा कि इस मामले की जांच और कार्रवाई में किसी प्रकार की कोताही नहीं होगी। सभी विभागीय प्रक्रियाओं और जांच का वीडियो रिकॉर्डिंग करना सुनिश्चित किया जाएगा ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और न्यायसंगत हो।
इस गंभीर मामला ने न केवल इटावा आयुर्विज्ञान विवि के प्रशासनिक ढांचे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज में मानसिक रूप से कमजोर महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता को भी उजागर किया है।
दीपक वर्मा, कुलसचिव, आयुर्विज्ञान विवि, ने कहा कि जांच पूरी होने तक आरोपी और सभी संबंधितों के खिलाफ नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी और न्यायालय के आदेश का पूरी तरह पालन किया जाएगा।


