लखनऊ। राजधानी में हर साल 31 मार्च को मिलने वाली सस्ती शराब की परंपरा इस बार टूट गई है। नई आबकारी नीति लागू होने के बाद शराब बिक्री और ठेकों के संचालन में बड़ा बदलाव किया गया है, जिसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा।
ठेकों के नवीनीकरण से खत्म हुआ ‘स्टॉक क्लियरेंस’ दबाव
अब नई नीति के तहत शराब के ठेकों का नवीनीकरण किया जा रहा है। पहले ठेका बदलने की स्थिति में दुकानदारों और ठेकेदारों पर पुराने स्टॉक को खत्म करने का भारी दबाव होता था, जिसके चलते 31 मार्च को भारी छूट दी जाती थी।
इस बार ऐसा कोई दबाव नहीं है, इसलिए सस्ती शराब मिलने की संभावना बेहद कम हो गई है।
अब पुराने स्टॉक की बिक्री जारी रहेगी
नई व्यवस्था के अनुसार, दुकानदार अपने पुराने स्टॉक को नए वित्तीय वर्ष में भी बेच सकेंगे। इससे उन्हें नुकसान से बचाव मिलेगा और जल्दबाजी में डिस्काउंट देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
जिले में लगभग 1100 शराब की दुकानें संचालित हैं, जहां यह नई नीति लागू होगी। इससे पूरे जिले में एक समान व्यवस्था लागू हो जाएगी।
पहले हर साल 31 मार्च को ठेके बदलते थे, जिससे पुराने लाइसेंसधारी स्टॉक खत्म करने के लिए भारी छूट देते थे। ग्राहक भी इस दिन का इंतजार करते थे क्योंकि शराब काफी कम कीमत पर मिलती थी।
नई आबकारी नीति ने शराब बिक्री के पुराने ट्रेंड को पूरी तरह बदल दिया है। जहां ठेकेदारों को राहत मिली है, वहीं ग्राहकों को 31 मार्च वाली सस्ती शराब से इस बार हाथ धोना पड़ सकता है।


