जिनेवा
स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बलूचिस्तान का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया। बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों को उठाते हुए वैश्विक समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की।
यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र के दौरान आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न देशों के कार्यकर्ताओं, विशेषज्ञों और वक्ताओं ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में लंबे समय से मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। उनका कहना था कि इस मुद्दे पर अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई है।
बीएनएम ने दावा किया कि क्षेत्र में लोगों को जबरन गायब किया जा रहा है, हिरासत में यातनाएं दी जा रही हैं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। संगठन ने इन मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग की।
वक्ताओं ने वैश्विक समुदाय से अपील की कि बलूचिस्तान के हालात को गंभीरता से लिया जाए और वहां के लोगों को न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
सम्मेलन में ऐतिहासिक संदर्भ भी उठाया गया। प्रतिभागियों ने बताया कि 27 मार्च को बलूच कार्यकर्ता उस दिन के रूप में याद करते हैं, जब 1948 में बलूचिस्तान के जबरन विलय का दावा किया जाता है।
उनका कहना है कि इसके बाद से ही क्षेत्र में असंतोष और विरोध की स्थिति बनी हुई है, जो समय-समय पर आंदोलन के रूप में सामने आती रही है।
हालांकि, पाकिस्तान सरकार इन सभी आरोपों को लगातार खारिज करती रही है। पाकिस्तान का कहना है कि वह अपने सभी प्रांतों में कानून व्यवस्था और विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार यह भी कहा है कि बलूचिस्तान में सुरक्षा कार्रवाई आतंकवाद और अलगाववाद से निपटने के लिए की जाती है।
इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के दावों के बीच सच्चाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है। ऐसे में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग भी उठ रही है।
बीएनएम ने सम्मेलन में बलूच लोगों के लिए आत्मनिर्णय के अधिकार की भी वकालत की। संगठन का कहना है कि क्षेत्र के लोगों को अपने भविष्य का फैसला खुद करने का अधिकार मिलना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुद्दा उठने से वैश्विक दबाव बढ़ सकता है, जिससे संबंधित पक्षों को जवाबदेही तय करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
जिनेवा में आयोजित यह सम्मेलन बलूचिस्तान के मुद्दे को एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में ले आया है, जिससे आने वाले समय में इस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया तेज हो सकती है।


