मुरादाबाद। बहुचर्चित मैनाठेर कांड में करीब 15 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 16 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फैसला एडीजे-द्वितीय कृष्ण कुमार की अदालत ने सुनाया, जिससे लंबे समय से लंबित इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया अपने निर्णायक पड़ाव पर पहुंची।
यह मामला वर्ष 2011 का है, जब मैनाठेर क्षेत्र में अचानक हिंसक बवाल भड़क उठा था। भीड़ ने उग्र रूप धारण करते हुए पुलिस चौकी और पीएसी के वाहनों में आग लगा दी थी। हालात इतने बिगड़ गए थे कि मौके पर पहुंची पुलिस टीम पर भी हमला किया गया, जिसमें तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना ने पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने साक्ष्यों, गवाहों के बयान और घटनाक्रम के आधार पर 16 आरोपियों को दोषी करार दिया। जिन लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, उनमें मंजूर अहमद, मोहम्मद अली, हाशिम, मोहम्मद कमरूल, मोहम्मद मुजीफ, मोहम्मद युनुस, मोहम्मद रिजवान, अंबरिश, कासिम, मोबिन, मोहम्मद मुजीब, तहजीब आलम, जान ए आलम, फिरोज, नाजिम और परवेज़ आलम शामिल हैं।
अदालत के फैसले के बाद सभी दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल भेज दिया गया। इस निर्णय को कानून-व्यवस्था के लिहाज से एक अहम संदेश माना जा रहा है कि हिंसा और पुलिस पर हमले जैसे गंभीर अपराधों में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
सरकारी पक्ष ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अदालत में मजबूत पैरवी की, जिसके चलते इतने वर्षों बाद पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सका। वहीं, इस फैसले के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी संतोष व्यक्त किया गया है कि लंबे समय से लंबित यह मामला अब निर्णायक रूप से निपट गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले भविष्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने और असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह फैसला न केवल मैनाठेर कांड से जुड़े पीड़ितों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि न्याय में भले ही समय लगे, लेकिन वह मिलता जरूर है।


