उन्नाव।गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र में गंगा का जलस्तर बढ़ने से तटीय इलाकों में संकट गहराता जा रहा है। खासकर रेती पर खेती करने वाले किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। अचानक बढ़े जलस्तर ने कई बीघा जमीन पर खड़ी फसल को जलमग्न कर दिया है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि गंगा किनारे रेती पर उगाई जाने वाली ककड़ी, खीरा और लौकी जैसी फसलें पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं। ये फसलें किसानों की आय का प्रमुख स्रोत होती हैं, लेकिन पानी बढ़ने से पूरी फसल बर्बाद हो गई। कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, ऐसे में नुकसान ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि हर साल गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव होता है, लेकिन इस बार पानी तेजी से बढ़ा, जिससे उन्हें संभलने का मौका ही नहीं मिला। कुछ किसानों ने समय रहते फसल बचाने की कोशिश की, लेकिन पानी की रफ्तार के आगे उनकी कोशिशें बेअसर साबित हुईं।
गांव के लोगों के अनुसार, प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस राहत नहीं पहुंची है। किसान मुआवजे की मांग कर रहे हैं और चाहते हैं कि उन्हें इस प्राकृतिक आपदा से उबरने के लिए तत्काल सहायता दी जाए।
स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन निगरानी बनाए हुए है, लेकिन किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही। गंगा का बढ़ता जलस्तर न केवल फसलों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए भी खतरा बनता जा रहा है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई किसानों की मुसीबत, रेती की खेती तबाह


