32 C
Lucknow
Tuesday, May 12, 2026

लिव-इन रिलेशनशिप अपराध नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

Must read

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि शादीशुदा पुरुष का किसी वयस्क महिला के साथ उसकी सहमति से लिव-इन में रहना अपने आप में अपराध नहीं माना जा सकता।
अदालत ने कहा कि जब तक इस प्रकार के संबंध में किसी कानून का उल्लंघन नहीं हो रहा है, तब तक ऐसे रिश्ते को आपराधिक कृत्य की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट का यह भी मानना है कि वयस्क व्यक्तियों को अपने जीवन से जुड़े निर्णय लेने की स्वतंत्रता है, जिसमें सहमति से साथ रहना भी शामिल है।
कोर्ट की इस टिप्पणी को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से जोड़कर देखा जा रहा है। भारतीय संविधान के तहत वयस्कों को अपनी पसंद से जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है, और इसी आधार पर अदालत ने यह स्पष्ट किया कि केवल लिव-इन रिलेशनशिप में रहना अपराध नहीं है।
हालांकि, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि ऐसे रिश्तों में किसी प्रकार की धोखाधड़ी, शोषण या अन्य कानूनी उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में ऐसे मामलों में मार्गदर्शक सिद्ध हो सकती है, जहां लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर विवाद उत्पन्न होते हैं। वहीं, इस फैसले के बाद समाज में इस विषय पर नई बहस छिड़ने की भी संभावना है।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article