नई दिल्ली। देश में विमानन सुरक्षा को लेकर चिंताजनक खुलासा हुआ है। संसदीय समिति की एक रिपोर्ट के अनुसार, जांच में शामिल 754 विमानों में से 377 में किसी न किसी प्रकार की तकनीकी खामी पाई गई है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विमानन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि विमानों के रखरखाव और नियमित जांच प्रक्रिया में कहीं न कहीं कमी रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में तकनीकी खामियां सामने आना सुरक्षा मानकों के लिए गंभीर चुनौती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में विमानन कंपनियों और संबंधित एजेंसियों को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नियमित निरीक्षण और तकनीकी जांच को और मजबूत करने की सिफारिश की गई है।
विमानन क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार, छोटी तकनीकी खामियां भी बड़े हादसों का कारण बन सकती हैं, इसलिए समय रहते इनका समाधान बेहद जरूरी है। यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं है।
इस रिपोर्ट के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या एयरलाइंस कंपनियां सुरक्षा मानकों को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं या नहीं। साथ ही नियामक संस्थाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी बहस तेज हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विमानन सुरक्षा को लेकर अब ठोस और सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि यात्रियों का भरोसा बना रहे और किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके।


