बरेली। फरीदापुर चौधरी गांव एक बार फिर पुलिस और प्रशासन के रडार पर आ गया है। पशु तस्करी के मामलों में पहले से चर्चित इस गांव में हाल ही में रेलवे मैदान के पास पशु अवशेष मिलने के बाद लगातार पुलिस दबिश दी जा रही है। हालांकि, हर बार कार्रवाई से पहले सूचना लीक हो जाने के कारण पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, इसी गांव के कुछ लोगों का नाम हालिया पशु तस्करी के मामलों में सामने आया है। इससे पहले भी गांव के कई लोगों को ऐसे मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है। तीन दिन पहले फरीदापुर नाले से गोवंश के अवशेष मिलने के बाद पुलिस ने सख्ती बढ़ाई और कुछ आरोपियों को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार भी किया था। इसके बाद फरीदापुर रोड पर व्यापक चेकिंग अभियान चलाया गया।
फरीदापुर चौधरी गांव का नाम पिछले साल 26 सितंबर को हुए बरेली बवाल में भी सामने आया था। उस दौरान पुलिस टीम पर तेजाब और पत्थरों से हमला किया गया था, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इस मामले में इज्जतनगर थाने में दर्ज मुकदमे में गांव के कई लोगों को नामजद किया गया था।
इन नामजद आरोपियों में रफीक बेग, लईक, शफीक अहमद, जाफर, रिजवान, नासिर, शकील, हसीन और वाजिद बेग शामिल हैं। इनमें से एक आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि मुख्य आरोपी वाजिद बेग के बरातघर पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई भी की थी। इसके बावजूद अधिकांश आरोपी अब तक फरार हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, बवाल मामले में शामिल आठ आरोपी अभी भी वांछित हैं। पुलिस की टीम लगातार गांव में दबिश दे रही है, लेकिन हर बार आरोपी पहले ही फरार हो जाते हैं। सूत्रों का दावा है कि कई वांछित आरोपी गांव में ही छिपे रहते हैं, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले उन्हें सूचना मिल जाती है।
लगातार सामने आ रहे मामलों के चलते फरीदापुर चौधरी गांव की छवि पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस का कहना है कि वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान जारी है और जल्द ही सभी को पकड़ लिया जाएगा। वहीं, बार-बार सूचना लीक होने की घटनाएं भी जांच के दायरे में हैं, जिससे कार्रवाई को प्रभावी बनाया जा सके।


