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Friday, March 27, 2026

आईएसआई का खतरनाक जाल: युवाओं को ‘हैंडलर’ बनाने का लालच देकर जासूसी में फंसा रहा पाकिस्तान

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मेरठ| पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अब भारत के युवाओं को जासूसी और देशविरोधी गतिविधियों में शामिल करने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रही है। जांच एजेंसियों के खुलासे में सामने आया है कि अब केवल पैसों का लालच ही नहीं, बल्कि युवाओं को भविष्य में ‘आईएसआई हैंडलर’ बनाने का झांसा देकर उन्हें अपने जाल में फंसाया जा रहा है। इस खतरनाक साजिश का खुलासा शामली जिले के बुटराड़ा गांव निवासी समीर की गिरफ्तारी के बाद हुआ है।
पुलिस जांच के अनुसार, पाकिस्तानी हैंडलर सरफराज द्वारा समीर समेत बिहार, दिल्ली, गाजियाबाद, पटना और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल किया गया था। इन युवाओं से रेलवे स्टेशनों, सुरक्षा बलों के ठिकानों और अन्य संवेदनशील स्थानों की फोटो, वीडियो और जीपीएस लोकेशन मंगवाई जाती थी, जिन्हें विदेशी नंबरों पर भेजा जाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी युवाओं को दो से तीन साल तक काम करने के बाद ‘हैंडलर’ बनाने और हर महीने मोटी रकम देने का लालच दिया जाता था। इसके साथ ही ‘मीरा’ नाम की एक महिला के माध्यम से युवाओं को संपर्क में लाया जाता था, जो आईएसआई के लिए काम कर रही थी। वह युवाओं को बहकाकर कहती थी कि अच्छा प्रदर्शन करने पर उन्हें संगठन में ऊंचा पद दिया जाएगा।
एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि आशंका है कि जिले के अन्य युवक भी इस नेटवर्क के संपर्क में हो सकते हैं। उनकी तलाश के लिए पुलिस, क्राइम ब्रांच और सर्विलांस टीम को सक्रिय कर दिया गया है।
रात 8 बजे के बाद दी जाती थी ऑनलाइन ट्रेनिंग
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि युवाओं को विदेशी नंबरों के जरिए ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाती थी। उन्हें सिखाया जाता था कि किस प्रकार फोटो और वीडियो बनाकर भेजनी है और जीपीएस लोकेशन ऑन रखनी है। शक से बचने के लिए यह ट्रेनिंग रात आठ बजे के बाद दी जाती थी।
कम पढ़े-लिखे युवक बन रहे आसान निशाना
जांच एजेंसियों के अनुसार आईएसआई खासतौर पर कम पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को निशाना बना रही है। गिरफ्तार समीर महज आठवीं कक्षा तक पढ़ा है और मजदूरी करता था। इससे पहले भी शामली के कलीम और उसका भाई तहसीम पकड़े जा चुके हैं, जो सीमित शिक्षा और आर्थिक तंगी के कारण इस जाल में फंस गए थे।
इंस्टाग्राम से शुरू हुई जासूसी की कहानी
समीर करीब डेढ़ साल पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए मेरठ निवासी नौशाद के संपर्क में आया था। नौशाद पहले से ही इस नेटवर्क का हिस्सा था और उसने समीर को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया, जहां से देशविरोधी गतिविधियों का संचालन किया जाता था। इसी ग्रुप में ‘मीरा’ नाम की महिला भी जुड़ी थी, जिसने समीर को हनीट्रैप में फंसाकर उसे इस नेटवर्क में पूरी तरह शामिल कर लिया।
जांच में यह भी सामने आया कि मीरा के कहने पर समीर ने मध्यप्रदेश में हथियारों की तस्करी में भी हाथ आजमाया और मुंबई व पंजाब तक गया। वहां उसे गिरोह के अन्य सदस्यों से मिलवाया गया और अवैध गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया।
परिवार को भनक तक नहीं लगी
समीर तीन भाइयों में मझला है और उसका परिवार मजदूरी कर जीवन यापन करता है। वह अक्सर घर से कई दिनों के लिए काम के बहाने बाहर जाता था, लेकिन परिवार को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि वह पाकिस्तान के लिए जासूसी जैसे गंभीर अपराध में शामिल हो चुका है।
फिलहाल गाजियाबाद पुलिस ने समीर सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे गहन पूछताछ जारी है। वहीं जांच एजेंसियों ने बुटराड़ा गांव और आसपास के क्षेत्रों में डेरा डालकर अन्य संदिग्ध युवाओं की तलाश शुरू कर दी है।
यह मामला एक बार फिर देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी बनकर सामने आया है, जो दर्शाता है कि दुश्मन देश अब डिजिटल माध्यमों और लालच के जरिए युवाओं को गुमराह कर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल करने की साजिश रच रहा है।

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