लखनऊ: एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) ने जीएसटी चोरी के एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है, जिसमें गिरफ्तार आरोपी केशवानी अब्बास हुसैन रमजान अली और उसके साथी रईस द्वारा कुल 59 फर्जी फर्मों का नेटवर्क चलाया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इन फर्मों के माध्यम से 500 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी की गई।
पुलिस और एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, केशवानी को पुणे से गिरफ्तार किया गया था। शुरुआती जांच में पता चला था कि आराध्या इंटरप्राइजेज नामक फर्म के जरिए उसने अपने साथी के साथ मिलकर करीब 100 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की। इसके बाद गहन जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी कुल 59 फर्मों का संचालन कर रहा था, जिनमें से सभी फर्जी और कागजों तक सीमित थीं।
इन फर्मों का रजिस्ट्रेशन उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, मुंबई और कर्नाटक समेत कई राज्यों के पते पर किया गया था। विशेष रूप से लखनऊ में चार फर्में—आराध्या इंटरप्राइजेज, एसएम ट्रेडर्स, राठौर इंटरप्राइजेज और गौड़ ट्रेडिंग—रजिस्टर की गई थीं, जिन पर तुरंत कार्रवाई की गई।
जांच में यह भी पता चला कि जिन पते पर ये फर्में दर्ज थीं, वहां कोई वास्तविक कार्यालय या व्यवसाय मौजूद नहीं था। आरोपी गरीब और जरूरतमंद लोगों को पैसों का लालच देकर उनके दस्तावेजों का उपयोग कर फर्में रजिस्टर कराते थे, जबकि उनके बैंक खातों और अन्य जरूरी एक्सेस को अपने पास रखते थे।
एसटीएफ के अधिकारियों ने कहा कि इस पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है। कई स्तरों पर नियमों के पालन की अनदेखी के कारण ऐसे घोटाले संभव हो पाए। यदि पंजीकरण से पहले सत्यापन और नियमों का कड़ाई से पालन किया जाता, तो इस प्रकार की बड़ी कर चोरी रोकी जा सकती थी।
एसटीएफ ने मामले की आगे की जांच तेज कर दी है और आरोपी के अन्य सहयोगियों तथा फर्जी फर्मों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसे बड़े आर्थिक अपराधों पर रोक लगाई जा सके।


