कासगंज। नए शिक्षा सत्र की शुरुआत से पहले ही महंगाई का असर अब शिक्षा से जुड़ी आवश्यक वस्तुओं पर साफ दिखाई देने लगा है। जिले में कागज की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, वहीं प्लास्टिक उत्पादों के दाम भी बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर स्कूलों में इस्तेमाल होने वाली किताबों, कॉपियों, स्टेशनरी, पानी की बोतलों और लंच बॉक्स जैसी वस्तुओं पर पड़ने वाला है। ऐसे में आगामी सत्र में अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ना तय माना जा रहा है।
जिले के बाजारों में फिलहाल नए सत्र को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। स्टेशनरी विक्रेता किताबों और अन्य सामग्री का स्टॉक जुटाने में लगे हुए हैं। हालांकि अभी स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं और प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह शुरू नहीं हुई है, लेकिन 1 अप्रैल से नामांकन शुरू होते ही बाजार में खरीदारी तेज होने की संभावना है। ऐसे में बढ़ी हुई कीमतें सीधे तौर पर अभिभावकों को प्रभावित करेंगी।
स्थानीय विक्रेताओं का कहना है कि कागज की कीमतों में आई तेजी के चलते प्रकाशकों ने भी किताबों और कॉपियों के दाम बढ़ाने के संकेत दिए हैं। विक्रेता अमित गुप्ता ने बताया कि करीब 15 दिन पहले जो स्टॉक मंगाया गया था, वह पुराने रेट पर उपलब्ध है, इसलिए फिलहाल कुछ किताबें और कॉपियां पुराने दामों पर मिल रही हैं। लेकिन जैसे ही नया माल बाजार में आएगा, कीमतों में स्पष्ट बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
इसी तरह व्यापारी रोहित अग्रवाल ने बताया कि पुराने स्टॉक की स्टेशनरी अभी पुराने दामों पर बिक रही है, लेकिन नए माल की कीमतें बढ़ चुकी हैं। आने वाले दिनों में बाजार में पुराने और नए दामों के बीच अंतर साफ दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि कागज और प्लास्टिक महंगे होने का सीधा असर शिक्षा सामग्री पर पड़ना तय है।
अभिभावकों में भी इस बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। अभिभावक धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि पहले ही किताबें और कॉपियां काफी महंगी हो चुकी हैं, ऐसे में कीमतों में और बढ़ोतरी से घरेलू बजट पर असर पड़ेगा। वहीं अभिभावक महेश कुमार ने सरकार से मांग की है कि निजी स्कूलों में भी सरकारी पाठ्यपुस्तकों को लागू किया जाए, ताकि शिक्षा का खर्च कम हो सके और आम लोगों को राहत मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले समय में शिक्षा का खर्च और अधिक बढ़ सकता है, जिससे मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ेगी। ऐसे में सरकार और संबंधित विभागों को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि शिक्षा सभी के लिए सुलभ और किफायती बनी रहे।


