लखनऊ। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में टेंडर प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। जौनपुर-गाजीपुर सर्किल में कथित तौर पर 6 में से 5 बिल्डर्स को बाहर कर एक ही फर्म को टेंडर देने की तैयारी का मामला उजागर हुआ है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में मिलीभगत और बंदरबांट के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए पहले से ही तय कर लिया जाता है कि किस फर्म को काम दिया जाएगा। इसके बाद तकनीकी आधारों पर अन्य बिडर्स को बाहर करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
मामले की शिकायत मिलने के बाद प्रमुख सचिव स्तर पर संज्ञान लिया गया है। विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित कर दी गई है, जो पूरे प्रकरण की पड़ताल करेगी।
सूत्र यह भी बताते हैं कि टेंडर मैनेजमेंट के लिए उच्च स्तर से दबाव बनाया जाता है। कथित तौर पर लखनऊ से ही यह तय कर लिया जाता है कि किसे टेंडर दिया जाएगा और इसकी जानकारी पहले से ही मुख्य अभियंता और अधिशासी अभियंताओं को दे दी जाती है। इसके बाद पूरी प्रक्रिया को उसी दिशा में मोड़ने का प्रयास होता है।
सबसे गंभीर आरोप यह भी है कि पारदर्शिता के लिए बनाए गए “प्रहरी ऐप” को पहले से ही निष्प्रभावी कर दिया गया है, जिससे निगरानी तंत्र कमजोर हो गया है।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। अब निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
पीडब्ल्यूडी में टेंडर घोटाले की आहट, 6 में से 5 बिल्डर बाहर करने के आरोप


