वाराणसी। यूपी कॉलेज परिसर में छात्र सूर्य प्रताप सिंह की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद पूरे संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कॉलेज में प्रॉक्टोरियल बोर्ड में 8 से 10 प्रोफेसर तैनात हैं और गेट पर 2-4 सुरक्षाकर्मी मौजूद रहते हैं, इसके बावजूद आरोपी हथियार लेकर परिसर में दाखिल हुआ और वारदात को अंजाम देकर फरार हो गया।
जानकारी के अनुसार, कॉलेज में सुरक्षा के नाम पर महज 15-20 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और अधिकांश हॉस्टल भी बंद पड़े हैं। करीब 15 हॉस्टल बंद होने के चलते केवल 50-60 छात्र ही न्यू हॉस्टल में रह रहे हैं। ऐसे में इतने बड़े परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर मानी जा रही है। घटना के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है।
हत्या के बाद कॉलेज प्रशासन ने एहतियातन शनिवार और रविवार को कक्षाएं बंद रखने का फैसला लिया है। सोमवार को प्रशासन के निर्देशों के आधार पर कॉलेज खोलने का निर्णय लिया जाएगा। इस घटना ने कॉलेज के विश्वविद्यालय बनने की प्रक्रिया पर भी असर डाला है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
छात्रों का आरोप है कि मृतक सूर्य प्रताप को हॉस्टल आवंटन नहीं मिला था, जिससे वह असुरक्षित स्थिति में रह रहा था। यदि उसे हॉस्टल मिल जाता, तो शायद यह घटना टल सकती थी। पूर्व छात्रों ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि पिछले 30 वर्षों में कई विवाद हुए, लेकिन इस तरह क्लासरूम के बाहर खुलेआम गोली मारकर हत्या की घटना पहली बार हुई है।
कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डीके सिंह ने बताया कि घटना के समय वे विज्ञान भवन में अन्य प्रोफेसरों के साथ नियमित कार्य में व्यस्त थे। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण सीमित है और शिक्षक सुरक्षा गार्ड की भूमिका नहीं निभा सकते। घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंप दिए गए हैं और जांच में सहयोग किया जा रहा है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक और आरोपी मंजीत चौहान के बीच पहले भी विवाद हो चुका था। आरोप है कि पहले हुए झगड़ों में मंजीत की पिटाई हुई थी, जिससे वह रंजिश रखता था। घटना के बाद पुलिस ने सर्विलांस के जरिए आरोपी को ट्रेस कर गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, परिजनों ने हरिश्चंद्र घाट पर सूर्य प्रताप का अंतिम संस्कार किया। घटना के बाद छात्रों का धरना और विरोध प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा।


