मैनपुरी। जनपद में किसान आत्महत्या के एक गंभीर मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के किशनी विधायक ने जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कुर्रा थाना क्षेत्र के ग्राम भीती में किसान प्रदीप कुमार की आत्महत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर किया गया। विधायक ने चकबंदी विभाग के अधिकारियों पर मनमानी, भ्रष्टाचार और मानसिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
मामले में मृतक किसान की पत्नी विपन उर्फ आरती, निवासी ग्राम भीती, थाना कुर्रा, ने प्रशासन को शिकायत देकर पूरी घटना से अवगत कराया है। उन्होंने बताया कि उनकी ग्राम पंचायत भौती, तहसील करहल में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही थी। उन्होंने और उनके पति प्रदीप कुमार ने अधिकारियों से अनुरोध किया था कि उनकी मूल जोत पर ही चक आवंटित किया जाए, क्योंकि उसी भूमि पर उनका पानी का बोरिंग इंजन लगा हुआ था और वे वर्षों से वहीं खेती करते आ रहे थे।
आरती का आरोप है कि चकबंदी कर्ता और सहायक चकबंदी अधिकारी ने उनकी बात को नजरअंदाज करते हुए उनकी उपजाऊ जमीन के स्थान पर दूसरी जगह चक आवंटित कर दिया, जो तालाब और ऊसर (बंजर) भूमि थी। इससे उनकी आजीविका पर संकट उत्पन्न हो गया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सहायक चकबंदी अधिकारी नरेंद्र कुमार वर्मा ने मूल जोत पर चक बनाए रखने के एवज में उनसे एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
रिश्वत देने से इंकार करने पर अधिकारी कथित रूप से आक्रोशित हो गए और प्रदीप कुमार को अपमानित करते हुए कहा कि वे कहीं जाकर मर जाएं और दोबारा उनका चेहरा न दिखाएं। इस घटना से आहत होकर प्रदीप कुमार और उनकी पत्नी घर लौट आए। अगले दिन प्रदीप कुमार गांव के प्रधान रामवीर और अन्य ग्रामीणों के साथ पुनः अधिकारी के पास पहुंचे, लेकिन आरोप है कि इस बार भी उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें कार्यालय से भगा दिया गया।
लगातार हो रहे अपमान और मानसिक उत्पीड़न से प्रदीप कुमार का मानसिक संतुलन बिगड़ गया। उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया और गहरे अवसाद में चले गए। अंततः 12 मार्च 2024 की रात उन्होंने अपने खेत पर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद से परिवार में कोहराम मचा हुआ है और परिजन न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
वहीं, इस पूरे मामले में चकबंदी अधिकारी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उनके संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है और भूमि आवंटन की प्रक्रिया में उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कोई हस्तक्षेप नहीं किया।
फिलहाल इस मामले को लेकर क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। सपा विधायक के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि जांच के बाद सच्चाई सामने लाकर दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।


