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Wednesday, March 18, 2026

बिजली बिल का सदमा बना जानलेवा: 1.60 लाख का मैसेज देख चाय विक्रेता की हार्ट अटैक से मौत, परिजनों का हंगामा

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इटावा

भरथना कस्बे से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां बिजली विभाग की कथित लापरवाही और अनियमितताओं के चलते एक गरीब चाय विक्रेता को अपनी जान गंवानी पड़ी। अचानक लाखों रुपये का बिजली बिल आने से सदमे में आए बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने शव को बिजली उपखंड कार्यालय पहुंचाकर जोरदार प्रदर्शन किया, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार, भरथना कस्बे के महावीर नगर मोहल्ला निवासी 58 वर्षीय शिवपाल सिंह कश्यप, जो हथठेले पर चाय बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे, उनके घर में करीब तीन महीने पहले स्मार्ट मीटर लगाया गया था। परिजनों का आरोप है कि मीटर लगने के बाद से ही बिजली बिल असामान्य रूप से बढ़ने लगा था। पहले महीने लगभग 20 हजार रुपये और दूसरे महीने करीब 60 हजार रुपये का बिल आया, जिससे परिवार आर्थिक संकट में आ गया।
बताया गया कि लगातार बढ़ते बिलों को लेकर शिवपाल सिंह कश्यप बेहद परेशान रहने लगे थे। उन्होंने कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों से शिकायत कर बिल संशोधन की मांग की, लेकिन हर बार उन्हें इधर-उधर भटकाया गया। कभी इटावा कार्यालय तो कभी भरथना उपखंड कार्यालय भेजा जाता रहा, जिससे उनकी चिंता और बढ़ती गई।
परिजनों के अनुसार, 17 मार्च की देर रात करीब 11 बजे शिवपाल सिंह के मोबाइल पर तीसरे महीने का बिजली बिल 1 लाख 60 हजार रुपये का मैसेज आया। इतने बड़े बिल को देखकर उन्हें गहरा सदमा लगा और अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। देखते ही देखते उन्हें दिल का दौरा पड़ा और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया।
घटना के बाद गुस्साए परिजन शव को लेकर भरथना बिजली उपखंड कार्यालय पहुंच गए और परिसर में शव रखकर जमकर हंगामा किया। परिजनों ने बिजली विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग की। प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए।
सूचना मिलने पर तहसीलदार दिलीप कुमार, थाना प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह सहित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया और मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। करीब तीन घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद परिजन शांत हुए और अधिकारियों के आश्वासन पर बिना पोस्टमार्टम कराए शव का अंतिम संस्कार करने को तैयार हो गए।
उपखंड अधिकारी दिलीप कुमार ने बताया कि मामले में गलत बिजली बिल और कर्मचारियों पर लगे आरोपों की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई है।
यह घटना न केवल बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किस प्रकार लापरवाही और अनदेखी आम नागरिकों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर आक्रोश व्याप्त है और लोग दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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