लखनऊ| पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और तनाव का असर अब भारत के कृषि निर्यात पर भी साफ दिखाई देने लगा है। खासकर बासमती चावल उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है, जहां एक ओर ईरान में निर्यातकों के 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान फंसे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर खाड़ी देशों से ऑर्डर रद्द होने और घरेलू बाजार में गिरती कीमतों ने स्थिति और खराब कर दी है।
मिली जानकारी के अनुसार, ईरान में पिछले चार से पांच महीनों के दौरान भेजे गए बासमती चावल का भुगतान अभी तक अटका हुआ है। बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन (BEDF) के संयुक्त निदेशक डॉ. रितेश शर्मा ने बताया कि यह बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे निर्यातकों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। भुगतान में देरी के कारण कारोबारी नई डील करने से भी बच रहे हैं।
इस संकट का सीधा असर चालू वित्त वर्ष पर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस स्थिति के चलते करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो सकता है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो बासमती उद्योग के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है, जिससे हजारों किसानों और इससे जुड़े व्यापारियों की आजीविका प्रभावित होगी।
उधर, सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देशों में जारी तनाव के कारण वहां तक समय पर आपूर्ति नहीं हो पा रही है। लॉजिस्टिक बाधाओं और सुरक्षा कारणों से कई शिपमेंट देरी से पहुंचे, जिसके चलते कई बड़े ऑर्डर रद्द कर दिए गए। इसका असर सीधे निर्यात पर पड़ा है।
घरेलू बाजार में भी बासमती चावल की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा। इस प्रकार निर्यात में गिरावट और कीमतों में कमी ने किसानों और व्यापारियों दोनों को दोहरी मार दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां जल्द हस्तक्षेप नहीं करतीं, तो बासमती उद्योग को लंबे समय तक नुकसान झेलना पड़ सकता है। ऐसे में वैकल्पिक बाजारों की तलाश और भुगतान तंत्र को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि इस संकट से उबरने का रास्ता निकाला जा सके।
खाड़ी संकट से बासमती निर्यात पर बड़ा असर, ईरान में फंसे 1000 करोड़ रुपये; किसानों और निर्यातकों पर दोहरी मार


