शाहजहांपुर के नाहिल गांव का विवाद अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पहले वैश्य समाज और ब्राह्मण समाज ने इसे अपने सम्मान से जोड़ा, और अब पाल समाज की एंट्री के बाद यह मामला और ज्यादा गंभीर होता नजर आ रहा है।
सोमवार को अखिल भारतीय पाल महासभा के जिलाध्यक्ष व सपा नेता अरविंद पाल अपने समर्थकों के साथ नाहिल गांव पहुंचे। गांव में पुरुष सदस्य नहीं मिले, जिसके बाद उन्होंने पीड़ित रामबहादुर पाल के परिवार की महिलाओं से मुलाकात कर उनकी आपबीती सुनी। परिवार का कहना है कि डर और धमकियों के कारण कई लोग घर नहीं लौट पा रहे हैं।
बुजुर्गों ने आरोप लगाया कि दबंगों द्वारा मारपीट के बाद थाने में भी प्रताड़ना झेलनी पड़ी और अब भी धमकियां दी जा रही हैं। ऐसे में परिवार दहशत के माहौल में जी रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े मामले में अब तक कोई जनप्रतिनिधि गांव क्यों नहीं पहुंचा? जबकि क्षेत्र से जुड़े कई बड़े नेता मौजूद हैं। उनकी चुप्पी और दूरी अब सवालों के घेरे में है।
वहीं अरविंद पाल के गांव पहुंचने के बाद यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है और सपा के प्रदेश स्तर तक पहुंच गया है। जानकारों का मानना है कि यह मामला शुरू में कुछ लोगों की दबंगई तक सीमित था, जिसे समय रहते सख्त कार्रवाई से रोका जा सकता था, लेकिन अब यह जातीय और सामाजिक टकराव का रूप लेता जा रहा है।
👉 क्या यह मामला अब समाज बनाम समाज की लड़ाई बनता जा रहा है?
👉 क्या प्रशासन और नेता समय रहते समाधान निकाल पाएंगे?


