बदायूं। मूसाझाग थाना क्षेत्र के सैजनी गांव स्थित एचपीसीएल प्लांट में दो अधिकारियों की हत्या के मामले में जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। मामले के बाद कंपनी के अधिकारियों ने प्लांट में कार्यरत कर्मचारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। जांच में संदिग्ध भूमिका सामने आने पर संबंधित कर्मचारियों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
एचपीसीएल प्रबंधन ने कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाली कार्यदायी संस्था को आदेश दिया है कि सैजनी गांव से जुड़े जिन कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जा रही है, उन्हें तत्काल सेवा से हटाया जाए। साथ ही उनकी जगह बाहर के क्षेत्रों से नए कर्मचारियों की भर्ती करने को कहा गया है। इस निर्णय के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि आरोपी के परिवार के कुछ सदस्य और रिश्तेदार भी प्लांट में नौकरी कर रहे थे। इसके अलावा गांव के कई अन्य लोग भी लंबे समय से यहां कार्यरत बताए जा रहे हैं। घटना के बाद अधिकारियों द्वारा की गई पड़ताल में यह तथ्य उजागर हुआ है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि करीब 20 से अधिक कर्मचारी ऐसे भी पाए गए जो नियमित ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होते थे, फिर भी उन्हें वेतन दिया जा रहा था। अब ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है और उनकी सेवाएं समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
उधर मामले के मुख्य आरोपी के मकान और दुकानों को प्रशासन ने चिह्नित तो कर लिया है, लेकिन अभी तक उन पर बुलडोजर की कार्रवाई नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई में देरी से आरोपी पक्ष को राहत पाने का समय मिल रहा है।
प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में अवैध कब्जों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। सैजनी गांव में बंजर भूमि पर मकान और दुकानें बनाने वाले करीब दस लोगों को नोटिस जारी किया गया है। दातागंज के उपजिलाधिकारी धर्मेंद्र कुमार सिंह के अनुसार तीन दिन के भीतर संतोषजनक जवाब न मिलने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


