कासगंज। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के असर का प्रभाव अब घरेलू गैस आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। एलपीजी गैस की सप्लाई में हो रही देरी के कारण स्थानीय बाजारों में भी इसका असर महसूस किया जा रहा है। समय पर गैस सिलिंडर न मिलने से आम लोगों की रसोई व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिसके चलते लोग अब खाना बनाने के लिए वैकल्पिक साधनों की ओर रुख करने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि पहले जहां उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर बुकिंग के बाद समय से मिल जाता था, वहीं अब सप्लाई में दो से तीन दिन तक की देरी हो रही है। इसके साथ ही गैस बुकिंग का अंतराल भी बढ़ गया है। पहले जहां एक सिलिंडर की बुकिंग लगभग 15 दिन के भीतर हो जाती थी, वहीं अब यह अवधि बढ़कर करीब 25 दिन तक पहुंच गई है। ऐसे में जिन परिवारों के पास अतिरिक्त सिलिंडर नहीं है, उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गैस आपूर्ति में हो रही देरी के कारण अब लोग रसोई के लिए वैकल्पिक उपाय तलाशने लगे हैं। इसका सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक बाजारों में देखने को मिल रहा है, जहां इन दिनों इंडक्शन चूल्हों की मांग अचानक बढ़ गई है। कई उपभोक्ता गैस की अनिश्चित सप्लाई को देखते हुए इंडक्शन चूल्हे और अन्य इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरण खरीद रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर बिजली के माध्यम से खाना बनाया जा सके।
स्थानीय इलेक्ट्रॉनिक दुकानदारों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सामान्य दिनों में जहां इनकी मांग सीमित रहती थी, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग गैस के विकल्प के रूप में इन्हें खरीद रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार यदि गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में इंडक्शन चूल्हों की मांग और अधिक बढ़ सकती है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस सिलिंडर मिलने में हो रही देरी और संभावित किल्लत की आशंका को देखते हुए इंडक्शन चूल्हा फिलहाल सबसे सुविधाजनक विकल्प साबित हो रहा है। इससे बिजली की मदद से आसानी से खाना बनाया जा सकता है और रसोई का काम भी प्रभावित नहीं होता। वहीं कई परिवारों ने गैस के साथ-साथ वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर इंडक्शन चूल्हा रखना भी शुरू कर दिया है, ताकि किसी भी स्थिति में घर की रसोई बंद न हो।


